स्वतंत्र बोल
लखनऊ 5 नवंबर 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भले ही समय बाकी हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अभी से चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दो दिवसीय गोरखपुर दौरे के दौरान संगठन और सरकार के शीर्ष नेताओं ने 2027 के चुनाव के लिए विस्तृत रणनीति पर गहन मंथन किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में 10 साल की एंटी-इनकंबेंसी से निपटने के साथ-साथ यूजीसी के नए इक्विटी नियमों के विरोध का काउंटर प्लान तैयार किया गया। इसके अलावा हिंदू मतदाताओं, युवाओं, महिला लाभार्थियों और पिछड़े समुदायों को जोड़ने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
वोटर लिस्ट पर बीजेपी की बारीक नजर
बीजेपी की चुनावी तैयारी का एक बड़ा हिस्सा मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ा है। पार्टी के भीतर यह चिंता जताई गई कि यदि बड़ी संख्या में समर्थकों के नाम सूची से छूट गए, तो पारंपरिक वोटर मतदान से वंचित हो सकते हैं। खास तौर पर हिंदू मतदाताओं के नाम कटने की आशंका को देखते हुए बूथ अध्यक्षों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। पार्टी का लक्ष्य है कि बूथ स्तर पर नए वोटरों को जोड़ने के साथ उन सभी लोगों के नाम सूची में दर्ज कराए जाएं, जो किसी वजह से छूट गए हैं।
30 साल से कम उम्र के युवा और महिला लाभार्थी पर फोकस
रणनीति के तहत 30 साल से कम उम्र के युवाओं को आकर्षित करने के लिए सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का प्रचार किया जाएगा। इसके तहत अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और मथुरा से जुड़े विमर्श को युवाओं के सामने रखा जाएगा। साथ ही, कांग्रेस व समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों के कार्यकाल, कानून-व्यवस्था और कथित तुष्टीकरण की राजनीति पर भी घेराबंदी की जाएगी। दूसरी ओर, केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार की आवास, मुफ्त राशन व आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं के महिला लाभार्थियों तक सीधी पहुंच बनाने पर जोर दिया गया है।
मंदिर-मस्जिद, कानून-व्यवस्था और विपक्ष को सोशल मीडिया पर जवाब
बीजेपी अपने विमर्श में विकास के साथ-साथ धार्मिक और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को मजबूती से उठाएगी। मुजफ्फरनगर दंगों से लेकर अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति और अयोध्या के विवादित ढांचे को लेकर सपा-कांग्रेस के रुख पर जनता के बीच बात रखी जाएगी। वहीं, विपक्ष के डिजिटल नैरेटिव का तुरंत जवाब देने के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर सोशल मीडिया नेटवर्क को और अधिक सक्रिय किया जाएगा।
कुर्मी, निषाद और मौर्य समाज को साधने का प्लान
2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों को देखते हुए सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति के मुकाबले बीजेपी ने गैर-यादव ओबीसी समुदायों—विशेषकर कुर्मी, निषाद और मौर्य वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके तहत इन समाजों के नेताओं को संगठन में तरजीह दी जाएगी। इसी बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पूर्व सांसद कमलेश पासवान के घर जाकर दलित समाज और निषाद पार्टी के अध्यक्ष मंत्री संजय निषाद के आवास पर मुलाकात कर निषाद समुदाय तक सीधा राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के आवास पर डिनर के जरिए पूर्वांचल में सामाजिक व संगठनात्मक तालमेल बैठाने का प्रयास किया गया।


