दो शिकायतें, निलंबन और बहाली; ASI पर अंतिम कार्रवाई का इंतजार

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स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 28 अक्टूबर 2026:
बिलासपुर में एएसआई ढोलाराम मरकाम के खिलाफ वसूली के आरोपों से जुड़े मामले में अब तक अंतिम कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। सिम्स चौकी में तैनाती के दौरान उन पर पोस्टमार्टम कराने के नाम पर यूपीआई के जरिए 20 हजार रुपये लेने का आरोप लगा था। शिकायत के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया था। बाद में उनकी बहाली कर मस्तूरी थाने में पोस्टिंग दी गई। वहां भी वसूली की शिकायत मिलने के बाद उन्हें लाइन अटैच किया गया। अब सिम्स चौकी से जुड़े मामले की जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की बात सामने आई है।

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पोस्टमार्टम कराने के नाम पर 20 हजार रुपये लेने का आरोप

नवंबर 2025 में एएसआई ढोलाराम मरकाम सिम्स चौकी प्रभारी के रूप में पदस्थ थे। इस दौरान लोरमी क्षेत्र के एक युवक ने शिकायत की थी कि अपने परिजन का पोस्टमार्टम कराने के लिए उसे 20 हजार रुपये देने पड़े। शिकायतकर्ता का आरोप था कि एएसआई ने जल्द पोस्टमार्टम कराने के नाम पर साइकिल स्टैंड संचालक के यूपीआई के माध्यम से यह रकम ली थी।

इसी दौरान कोटा क्षेत्र के रिगरिगा में रहने वाले एक अन्य युवक ने भी एएसआई पर आरोप लगाया था। युवक का कहना था कि 500 रुपये के लिए उसके पिता का शव नहीं दिया जा रहा था। इन शिकायतों के सामने आने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने एएसआई को निलंबित कर दिया था।

बहाली के बाद मस्तूरी में भी शिकायत

निलंबन के कुछ दिन बाद एएसआई को बहाल कर मस्तूरी थाने में पदस्थ किया गया। यहां भी उन पर मुर्गी फार्म संचालक से वसूली की शिकायत मिली। इसके बाद उन्हें लाइन अटैच कर दिया गया।

इस बीच सिम्स चौकी में यूपीआई के माध्यम से कथित वसूली के मामले की जांच की गई। बताया गया है कि जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। हालांकि, इस मामले में अब तक अंतिम कार्रवाई होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

जांच रिपोर्ट पर फैसले का इंतजार

एक ही पुलिसकर्मी के खिलाफ अलग-अलग समय पर शिकायतें सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई की स्थिति अहम हो गई है। पहले निलंबन हुआ, फिर बहाली के बाद दूसरी पोस्टिंग पर भी शिकायत मिली। इसके बाद एएसआई को लाइन अटैच किया गया।

अब मुख्य सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट पर उच्च अधिकारियों ने क्या निर्णय लिया है। विभागीय जांच की समय-सीमा क्या है और कार्रवाई में देरी की वजह क्या है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक किए जाने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।