दिवाली से पहले रामलीला मैदान में कांग्रेस की महारैली, व्यापारी क्यों चाहते हैं तारीख बदले?

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नई दिल्ली 27 अक्टूबर 2026:
दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित महारैली को दिवाली के बाद कराने की मांग की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की अपील की है। CTI ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी पत्र की कॉपी भेजी है और सहयोगी दलों से इस मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की है।

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CTI का कहना है कि दिवाली के व्यस्त कारोबारी सीजन में 10 लाख लोगों की रैली होने से रामलीला मैदान के आसपास के 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने कारोबार ठप होने और जाम लगने की आशंका जताई है। उसने रैली 10 नवंबर के बाद कराने या इसे रामलीला मैदान की जगह बुराड़ी ग्राउंड अथवा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित करने का सुझाव दिया है।

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पार्किंग और रास्तों को लेकर व्यापारियों की चिंता

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, राहुल गांधी ने सोमवार, 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर व्यापारियों के नाम संबोधन जारी किया था। संगठन का कहना है कि इसमें 1 नवंबर को ही रैली करने की बात कही गई। इसके बाद रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों के व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है।

व्यापारियों के सामने सवाल है कि क्या 31 अक्टूबर से बैरिकेडिंग होगी और रास्ते बंद किए जाएंगे। उन्हें यह भी चिंता है कि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को दुकानें खुल पाएंगी या नहीं और ग्राहक बाजारों तक पहुंच सकेंगे या नहीं।

CTI के अनुमान के मुताबिक, रैली में आने वाले लोगों के वाहनों की संख्या 15 हजार से 20 हजार तक हो सकती है। संगठन ने गणना के आधार पर कहा है कि 50 लोगों की क्षमता वाली बसों से भी 10 हजार से 12 हजार बड़ी बसें आ सकती हैं। इसके अलावा 5 हजार से 7 हजार छोटी गाड़ियों, कारों, टेंपो ट्रैवलर, मिनी बसों और ई-रिक्शा के आने की आशंका जताई गई है।

संगठन का कहना है कि रामलीला मैदान के आसपास 200 से ज्यादा वाहनों की अधिकृत पार्किंग उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वाहनों की पार्किंग और बाजारों तक पहुंचने वाले रास्तों को लेकर परेशानी हो सकती है।

पुरानी दिल्ली के 20 बाजार हो सकते हैं प्रभावित

CTI के अनुसार, रामलीला मैदान के आसपास पुरानी दिल्ली के कई बड़े थोक और खुदरा बाजार हैं। मैदान तक पहुंचने वाले रास्ते इन बाजारों से होकर गुजरते हैं। संगठन ने कहा कि दिल्ली-6 की कई गलियां 10 से 12 फीट चौड़ी हैं। ऐसे में एक ट्रक फंसने से भी लंबा जाम लग सकता है।

संगठन ने जिन बाजारों पर असर पड़ने की आशंका जताई है, उनमें चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, नबी करीम, करोल बाग, अजमेरी गेट और दरियागंज शामिल हैं।

इसके अलावा नई सड़क, किनारी बाजार, दरीबा कलां, फतेहपुरी, लाहौरी गेट, फिल्मिस्तान, पहाड़गंज, गफ्फार मार्केट, जामा मस्जिद का मीना बाजार, लाल किला स्थित लाजपत राय मार्केट और नया बाजार को भी प्रभावित होने वाले बाजारों में गिनाया गया है।

10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का CTI का दावा

CTI ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक कार्यक्रम में करीब 3 से 4 हजार लोगों के शामिल होने से ही पूरी सेंट्रल दिल्ली में आवाजाही प्रभावित हुई थी। संगठन के मुताबिक, उस कार्यक्रम से व्यापारियों को करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

CTI का अनुमान है कि 1 नवंबर को 10 लाख लोगों की रैली होने पर पुरानी दिल्ली का कारोबार ठप हो सकता है और करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान संगठन का अनुमान है।

CTI ने क्या मांग की?

व्यापारी संगठन ने जनहित और व्यापारियों के हित में रैली 10 नवंबर, भैया दूज के बाद कराने की मांग की है। CTI ने कहा है कि अगर 1 नवंबर को ही रैली करना जरूरी है, तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे खुले स्थान पर आयोजित किया जाए, ताकि आसपास के बाजारों पर असर कम हो सके।