शिक्षाकर्मी भर्ती में कथित अनियमितताओं पर ब्यूरो की कार्रवाई, जानिए पूरा मामला

Officials reviewing case files

स्वतंत्र बोल
रायपुर27 अक्टूबर 2026:
कवर्धा जिले के पंडरिया में वर्ष 1998 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो ने 22 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया है। करीब 1,000 पन्नों के इस चालान में छह तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया है। मामले में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, साक्षात्कार में अंकों की हेराफेरी, आरक्षण नियमों की अनदेखी और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।

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यह भर्ती 320 पदों के लिए हुई थी। मामले की जांच तत्कालीन जनपद पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी की 25 दिसंबर 1998 को दी गई लिखित शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद अपराध क्रमांक 48/2000 दर्ज किया गया। लंबी जांच के बाद ब्यूरो ने विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कवर्धा की अदालत में अभियोजन चालान पेश किया है।

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साक्षात्कार से पहले अनुभव के अंक जोड़ने का आरोप

जांच के मुताबिक, मध्यप्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी नियम, 1997 के तहत पात्रता परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर रिक्त पदों की संख्या से तीन गुना अभ्यर्थियों की वर्गवार साक्षात्कार सूची तैयार की जानी थी। आरोप है कि तत्कालीन चयन समिति ने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया और साक्षात्कार से पहले ही अध्यापन अनुभव के बोनस अंक जोड़ दिए।

ब्यूरो के अनुसार, इससे अभ्यर्थियों की वास्तविक मेरिट प्रभावित हुई और पात्र अभ्यर्थियों के बजाय कथित रूप से अपात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। जांच में सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए 160 महिलाओं को बुलाने के बावजूद क्षैतिज आरक्षण और वर्गवार समायोजन के नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। दिव्यांग वर्ग के पदों पर भी योग्य और उपलब्ध अभ्यर्थियों की अनदेखी कर चयन करने का आरोप है।

नियमित छात्र रहते अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्र देने का आरोप

जांच में दस्तावेजों के आधार पर सामने आया कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने जिस अवधि के अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्र जमा किए थे, उसी दौरान वे विभिन्न महाविद्यालयों में नियमित छात्र के रूप में पढ़ाई कर रहे थे। वे शासकीय छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर रहे थे।

आरोप है कि चयन समिति के सामने आपत्तियां दर्ज होने के बावजूद इन प्रमाणपत्रों को स्वीकार किया गया। संबंधित अभ्यर्थियों को अनुभव के बोनस अंक देकर नियुक्ति दी गई।

चयन समिति के सदस्यों पर रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप

जांच में तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और सदस्य बृजबिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा पर अपने निकट संबंधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है। आरोप के मुताबिक, संबंधित सदस्य अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार में खुद शामिल हुए और उन्हें मनमाने अंक दिए। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपने पारिवारिक संबंधों की जानकारी पहले से घोषित नहीं की।

इस मामले में उग्रसेन चंद्रवंशी, नीरा चंद्रवंशी, विनीता वैष्णव, देवेश वैष्णव, स्वर्णा वैष्णव, कौशल्या वैष्णव और शैल तिवारी के नाम सामने आए हैं।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में चालान

ब्यूरो ने तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. भारती, अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण एन.आर. वर्मा, चयन समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और सदस्य हरिराम धृतलहरे समेत 16 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ चालान पेश किया है।

आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड विधान की धाराओं 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत कार्रवाई की गई है। मामले के तीन अन्य आरोपी अधिकारियों और समिति सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है। इसकी जानकारी भी अदालत को दे दी गई है।

अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों पर विचार किया जाएगा।