स्वतंत्र बोल
रायपुर 23 अक्टूबर 2026: बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार के नाम को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जनजातीय समाज का लगातार वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन अब यह समाज उससे दूर हो चुका है। साय ने कांग्रेस से सवाल किया कि देश में इतने साल शासन करने के दौरान उसने जनजातीय समाज के लिए क्या किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा की। वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ जगदलपुर के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रपति के बस्तर दौरे को छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन बताया।
मुरिया दरबार के नाम पर कैसे शुरू हुआ विवाद?
बस्तर दशहरा के कार्यक्रमों की जानकारी देने वाले प्रशासनिक पाम्पलेट में मुरिया दरबार की जगह ‘आम दरबार’ नाम छाप दिया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे और विवाद बढ़ गया।मामला गरमाने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को नया पाम्पलेट जारी किया। इसमें ‘आम दरबार’ की जगह फिर से ‘मुरिया दरबार’ नाम दर्ज किया गया।
बस्तर की करीब 700 साल पुरानी परंपरा है मुरिया दरबार
मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। राजशाही के दौर में राजा इस दरबार में बैठते थे। गांवों के मांझी-चालकी यहां अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखते थे और राजा उनका समाधान करते थे।राजशाही समाप्त होने के बाद भी यह परंपरा जारी है। अब मुख्यमंत्री इस दरबार में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं।
पिछले साल अमित शाह हुए थे शामिल
पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुरिया दरबार में शामिल हुए थे। इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम है। वह मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों से उनके गांवों की समस्याएं सुनेंगी।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में देश का सबसे लंबा बस्तर दशहरा मनाया जाता है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि पहली बार देश की राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में शामिल हो रही हैं। साय ने जनजातीय समाज के विकास को लेकर अपनी सरकार के काम का भी जिक्र किया और कांग्रेस से उसके शासनकाल में किए गए कार्यों का जवाब मांगा।


