रंगमंच से छत्तीसगढ़ी सिनेमा तक, प्रदेश के 2 कलाकारों को राष्ट्रीय सम्मान

1792484912 15100109546536397c35

स्वतंत्र बोल
रायपुर 20 अक्टूबर 2026:
छत्तीसगढ़ के जशपुर के डॉ. आनन्द पाण्डेय और सारंगढ़ के घनश्याम साहू को संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के रविन्द्र भवन स्थित मेघदूत थिएटर परिसर में आयोजित समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने दोनों कलाकारों को सम्मान दिया। डॉ. पाण्डेय को रंगमंच में उत्कृष्ट अभिनय और घनश्याम साहू को विशिष्ट नाट्य लेखन व छत्तीसगढ़ी फिल्मों में पटकथा लेखन के लिए यह पुरस्कार मिला।

ad

1792484935 1db5dc78dc2f6bce65c2

youtube

जशपुर के डॉ. आनन्द पाण्डेय को अभिनय के लिए सम्मान

जशपुर के डॉ. आनन्द पाण्डेय ने सुदूर आदिवासी अंचल में रंगमंच की परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उनकी उपलब्धि जशपुर सहित सरगुजा अंचल और छत्तीसगढ़ के रंगमंच से जुड़े कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण है। यह सम्मान प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में काम कर रहे कलाकारों की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का उदाहरण है।

सारंगढ़ के घनश्याम साहू को नाट्य लेखन और पटकथा के लिए पुरस्कार

सारंगढ़ के घनश्याम साहू को विशिष्ट नाट्य लेखन और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में प्रभावशाली पटकथा लेखन के लिए सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धि प्रदेश के नाट्य लेखन और छत्तीसगढ़ी सिनेमा के क्षेत्र में काम कर रहे रचनाकारों के लिए अहम है।

नाटक और फिल्मों में कहानी, संवाद और पात्रों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में लेखक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। घनश्याम साहू को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान छत्तीसगढ़ी भाषा और सिनेमा के रचनात्मक कार्यों को पहचान देता है।

छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय मंच पर पहचान

संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है। छत्तीसगढ़ के दो कलाकारों को यह पुरस्कार मिलना प्रदेश की रंगमंचीय और रचनात्मक प्रतिभा के लिए गौरव की बात है।

छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं, बोलियां, जनजीवन और सामाजिक संवेदनाएं यहां के कलाकारों को सृजन के अनेक अवसर देती हैं। जशपुर और सारंगढ़ के कलाकारों की यह उपलब्धि दिखाती है कि प्रदेश के छोटे शहरों और दूरस्थ अंचलों से जुड़े रचनाकार भी राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं।