HMT से जीरा राइस तक बढ़े दाम, छत्तीसगढ़ में चावल क्यों हुआ महंगा?

Shopkeeper weighing rice in store

स्वतंत्र बोल
रायपुर 20 अक्टूबर 2026:
रायपुर समेत छत्तीसगढ़ में चावल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। राइस मिलरों के पास पुराने धान का स्टॉक लगभग खत्म होने और त्योहारी सीजन में सुगंधित व ब्रांडेड चावल की मांग बढ़ने से महीनेभर में कीमतें 10 से 25 रुपए प्रति किलो तक चढ़ गई हैं। 19 अक्टूबर तक जीरा राइस 100 से 110 रुपए किलो और HMT चावल 65 से 70 रुपए किलो बिक रहा था। कारोबारियों के मुताबिक, नए धान की आवक शुरू होने तक बाजार में आपूर्ति का दबाव बना रह सकता है। नवंबर के अंत के बाद कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

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HMT से जीरा राइस तक, एक महीने में कितने बढ़े दाम?

सितंबर और 19 अक्टूबर के बीच चावल की प्रमुख किस्मों के दाम बढ़े हैं। जीरा राइस की कीमत 80-85 रुपए से बढ़कर 100-110 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। वहीं, HMT चावल अब 65-70 रुपए किलो बिक रहा है।

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चावल की किस्म सितंबर में कीमत 19 अक्टूबर की कीमत बताई गई बढ़ोतरी
HMT ₹50-60 ₹65-70 ₹15
काली मूंछ ₹58-68 ₹70-78 ₹12
श्रीराम ₹65-75 ₹75-88 ₹13
अब्बा हुजूर ₹75-76 ₹90-95 ₹19
जीरा राइस ₹80-85 ₹100-110 ₹25
जवाफूल ₹115-120 ₹125-140 ₹20

नोट: कीमतें रुपए प्रति किलो में हैं। गुणवत्ता और ब्रांड के हिसाब से भाव अलग हो सकते हैं। बढ़ोतरी के आंकड़े दिए गए मूल्य-दायरों की तुलना पर आधारित हैं।

चावल महंगा होने की 4 बड़ी वजहें

1. पुराने धान का स्टॉक लगभग खत्म

पिछले खरीफ सीजन का धान राइस मिलरों के पास लगभग खत्म हो चुका है। स्थानीय बाजार में भी पुराना स्टॉक कम बचा है। नई फसल आने से पहले मिलों को पर्याप्त धान नहीं मिल रहा, जिससे चावल का उत्पादन और बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

2. त्योहारों में बढ़ी मांग

नवरात्रि और दशहरा के बाद दिवाली के दौरान भी चावल की मांग बनी हुई है। खासकर HMT, काली मूंछ, श्रीराम, जीरा राइस और जवाफूल जैसी किस्मों की मांग बढ़ने से उपलब्ध स्टॉक पर दबाव पड़ा है।

3. दूसरे राज्यों से महंगा धान खरीदना पड़ रहा

छत्तीसगढ़ में अच्छी गुणवत्ता वाले बारीक और सुगंधित धान की उपलब्धता सीमित होने के कारण मिलरों को मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों से भी धान खरीदना पड़ रहा है। वहां कीमतें ज्यादा होने के साथ लंबी दूरी से परिवहन का खर्च भी जुड़ता है। इससे चावल की उत्पादन लागत बढ़ रही है।

4. उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ी

मजदूरी, ढुलाई और दूसरी लागतों में बढ़ोतरी का असर भी चावल की कीमतों पर पड़ रहा है। कारोबारियों ने मानसून के दौरान फसल और बाजार में आवक प्रभावित होने की बात भी कही है।

दूसरे राज्यों में कितने भाव पर मिल रहा धान?

दूसरे राज्यों से धान की खरीदारी भी छत्तीसगढ़ के मिलरों के लिए महंगी पड़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में बारीक और सुगंधित धान के भाव इस प्रकार हैं:

  • मध्यप्रदेश: धान 2,400 से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल तक। सुगंधित किस्मों के दाम 4,600 रुपए प्रति क्विंटल तक बताए गए हैं।
  • महाराष्ट्र: गोंदिया और भंडारा में बारीक धान 3,200 से 4,500 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है।
  • ओडिशा: किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के ऊपर 800 रुपए की इनपुट सहायता मिलने से कीमतों पर असर पड़ने की बात कही गई है।

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, केंद्र की ओर से सामान्य धान का MSP 2,369 रुपए और ग्रेड-A धान का 2,389 रुपए प्रति क्विंटल तय है। बारीक और सुगंधित धान के खुले बाजार के भाव इससे अधिक हैं।

नया धान आने तक बनी रह सकती है परेशानी

छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांतिलाल बोथरा के मुताबिक, राइस मिलरों के पास धान लगभग खत्म हो चुका है। दूसरी ओर, त्योहारी सीजन में मांग बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में आपूर्ति नहीं हो पा रही। उन्होंने कहा कि नया धान आने तक यह स्थिति बनी रह सकती है।

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने भी कहा कि दिवाली तक चावल की मांग ज्यादा रहती है। फिलहाल मिलरों के पास धान की कमी के कारण बाजार में सप्लाई प्रभावित है और अच्छे ब्रांड के चावल महंगे हुए हैं। नवंबर के अंत के बाद कीमतों में कुछ कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, राहत कितनी होगी, यह नई फसल की आवक और बाजार में आपूर्ति पर निर्भर करेगा।