QR Code का फोटो खींचकर च्वाइस सेंटर्स को लगाते थे चूना! छत्तीसगढ़ में शातिर ठग गिरोह बेनकाब

Police investigating QR code fraud

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 14 अक्टूबर 2026:
 छत्तीसगढ़ में च्वाइस सेंटर संचालकों के QR कोड का दुरुपयोग कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का रेंज साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में रायपुर निवासी अंकित आहूजा (32) और आशीष केवटवानी (32) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाया। अब तक सामने आए मामलों में धोखाधड़ी की रकम 20 से 25 लाख रुपये के बीच आंकी गई है।

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पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल की गई एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

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QR कोड की फोटो लेकर नकदी लेते थे आरोपी

पुलिस के मुताबिक, बिलासपुर जिले में बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 5 अक्टूबर को दोपहर करीब 12.38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से उनके सेंटर पहुंचा। उसने खुद को फोन-पे से जुड़े लेन-देन का व्यक्ति बताया और QR कोड के जरिए आने वाली रकम के बदले नकद भुगतान करने को कहा।

संचालक की सहमति के बाद आरोपी ने QR कोड की फोटो अपने मोबाइल में ली और वहां से चला गया। इसके बाद QR कोड का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपये का लेन-देन किया गया। संचालक ने संबंधित व्यक्ति को नकद रकम दे दी।

अगले दिन संचालक के बैंक खाते पर रोक लग गई। बैंक से पूछताछ करने पर पता चला कि फोन-पे खाते का संबंध साइबर ठगी की रकम से होने के कारण उसे होल्ड किया गया है। बाद में च्वाइस सेंटर संचालकों के वाट्सऐप समूह से उन्हें जानकारी मिली कि इसी तरीके से दूसरे संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है।

एक QR कोड की फोटो भेजता, दूसरा करता था लेन-देन

शिकायत मिलने के बाद रेंज साइबर पुलिस ने जांच शुरू की। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गठित टीम आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में कथित तौर पर इसी तरह की वारदात करने के प्रयास में घूमता मिला। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अंकित ने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर ठगी करने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि अंकित अलग-अलग च्वाइस सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर पहुंचकर संचालकों के QR कोड की फोटो लेता था। इसके बाद वह फोटो अपने साथी आशीष को भेज देता था।

आशीष उस QR कोड के जरिए रकम का लेन-देन करता था। वहीं, अंकित सेंटर संचालक से उसके बदले नकद रकम लेकर निकल जाता था। बाद में जब साइबर ठगी की रकम से संबंध होने के कारण संचालकों के बैंक खाते होल्ड होते थे, तब उन्हें धोखाधड़ी का पता चलता था।

नौ जिलों में 45 संचालकों को बनाया निशाना

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाया।

अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन मिले हैं। इनके आधार पर धोखाधड़ी की कुल रकम 20 से 25 लाख रुपये के बीच होने का अनुमान है। पुलिस अन्य पीड़ितों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

इस कार्रवाई में रेंज साइबर थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा, सहायक उप निरीक्षक अशोक कश्यप और आरक्षक दीपक उपाध्याय व दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।