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नई दिल्ली 12 अक्टूबर 2026: राजस्थान के भरतपुर जिले के भौंड़ा गांव में रविवार शाम क्रेशर प्लांट को लेकर विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया। बयाना के पूर्व विधायक और बीजेपी नेता अतर सिंह भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें जयपुर के SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रात करीब 11:30 बजे उनकी मौत हो गई। भड़ाना पक्ष पर 70-80 लोगों के हमले का आरोप है। घटना के बाद गांव में तनाव है और पुलिस बल तैनात किया गया है।
क्रेशर प्लांट पर कैसे शुरू हुआ विवाद?
घटना रविवार शाम करीब 6:30 बजे की है। अतर सिंह भड़ाना वैर थाना क्षेत्र के भौंड़ा गांव स्थित अपने क्रेशर प्लांट पर मौजूद थे। बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक साल से बंद पड़े क्रेशर को दोबारा चालू कराने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान ग्रामीणों और भड़ाना पक्ष के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने लाठी-पत्थरों से हमला कर दिया। संघर्ष में भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा निवासी नदबई गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को पहले वैर उप जिला अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर भड़ाना को जयपुर और गगन शर्मा को भरतपुर रेफर किया गया। जयपुर के SMS अस्पताल में इलाज के दौरान भड़ाना की मौत हो गई।
पत्नी का आरोप- पुलिस-प्रशासन को दी थी जानकारी
पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि क्रेशर की लीज का कनेक्शन काट दिया गया था और वाटर पंप भी खराब कर दिया गया था। लीज पर जाने वाले लोगों को भी वहां से भगाया जा रहा था।
कमलेश के मुताबिक, इन घटनाओं की जानकारी पुलिस और प्रशासन को लगातार दी जा रही थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि रविवार शाम 6:30 से 7 बजे के बीच 70-80 लोगों ने उनके पति और अन्य लोगों पर हमला किया।
गोली लगने के दावे पर भी उठे सवाल
अतर सिंह भड़ाना की पत्नी ने उन्हें गोली लगने की बात कही है। हालांकि, वैर अस्पताल के डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में गोली लगने की आशंका से इनकार किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संघर्ष के दौरान फायरिंग हुई थी या नहीं। वैर उप जिला अस्पताल के डॉक्टर रवि के अनुसार, रात करीब 8:15 बजे घायलों को अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेफर किया गया।
चार साल पुराना है क्रेशर प्लांट का विवाद
थाना प्रभारी के अनुसार, करीब चार साल पहले क्रेशर संचालक और ग्रामीणों के बीच झगड़ा और मारपीट हुई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि क्रेशर के लिए चारागाह भूमि पर अतिक्रमण किया गया और अवैध खनन किया जा रहा था। लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर भी विवाद था।
ग्रामीणों के मुताबिक, वे पिछले करीब दो साल से इस मुद्दे पर बीच-बीच में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। पिछले एक साल से क्रेशर बंद था और उसे दोबारा चालू कराने की कोशिश की जा रही थी।
ग्रामीणों ने बताई संघर्ष की अलग कहानी
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 10-15 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। उनके मुताबिक, रविवार शाम भड़ाना पक्ष के 40-50 लोग वहां पहुंचे और उन्हें धरना स्थल से हटा दिया। इसके बाद विवाद बढ़ा और दोनों पक्षों के बीच लाठी-पत्थर चले।वहीं, भड़ाना की पत्नी ने 70-80 लोगों के हमले का आरोप लगाया है। इस तरह घटना को लेकर दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि घटना से पहले किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया गया था।
फायरिंग हुई या नहीं, पुलिस जुटा रही जानकारी
पुलिस के मुताबिक, घटना के समय क्रेशर प्लांट पर करीब 20-25 कर्मचारियों के मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस संघर्ष के दौरान फायरिंग होने या न होने और घायलों की संख्या का पता लगा रही है। अतर सिंह भड़ाना की मौत के बाद गांव में पुलिस बल तैनात है। जांच में अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और फायरिंग के आरोपों में कितनी सच्चाई है।


