तकनीकी पदों पर प्रशासनिक दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं..छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ उठाई आवाज

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स्वतंत्र बोल
रायपुर 12 अक्टूबर 2026:
 छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ डॉक्टरों की पदोन्नति और तकनीकी पदों पर नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि पिछले करीब 20 साल से नियमित प्रमोशन नहीं हुए हैं, जबकि संचालनालय के कई महत्वपूर्ण पदों पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है। इस व्यवस्था के विरोध में वरिष्ठ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इससे डॉक्टर संवर्ग की पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

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20 साल से क्यों अटकी है डॉक्टरों की पदोन्नति?

राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (राजपत्रित) भर्ती नियम, 1988 को अपना लिया था। डॉक्टरों के अनुसार, मध्यप्रदेश ने समय के साथ इन नियमों में कई संशोधन किए और पदोन्नति का रास्ता साफ किया, लेकिन छत्तीसगढ़ में करीब 20 साल से नियमों में संशोधन नहीं हुआ। मौजूदा नियमों के मुताबिक, डॉक्टर सेवा के 10 साल पूरे करने के बाद पहली पदोन्नति के पात्र हो जाते हैं। इसके बाद हर तीन साल में पदोन्नति का प्रावधान है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित पदोन्नति नहीं होने से विभाग में कई पद प्रभार के भरोसे चल रहे हैं। वरिष्ठ वेतनमान में पे-ग्रेड 8900, 8700 और 7600 पर अटके डॉक्टरों को इसका वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, इससे हर वरिष्ठ डॉक्टर को हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है।

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इन महत्वपूर्ण पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति

डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग के कई महत्वपूर्ण पदों पर गैर-चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारियों की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन पदों की जिम्मेदारियां चिकित्सा, स्वास्थ्य कार्यक्रमों और तकनीकी कामकाज से जुड़ी हैं।डॉक्टरों के मुताबिक, राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान के संचालक पद पर प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की गई है। यह संस्थान विशेषज्ञों, चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मचारियों के प्रशिक्षण से जुड़ा है।इसी तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक पद पर भी प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। संयुक्त संचालक, स्थापना और संयुक्त संचालक, भवन विकास जैसे पदों पर भी प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया गया है। भवन विकास शाखा अस्पतालों की अधोसंरचना और भवन निर्माण से जुड़े तकनीकी निर्णयों से संबंधित हैडॉक्टरों का यह भी कहना है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के परियोजना संचालक का प्रभार राज्य प्रशासनिक सेवा के 2018 बैच के अधिकारी को दिया गया है। उनके अनुसार, यह डॉक्टर संवर्ग का पद है।इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम और अस्पताल प्रशासन में चार ग्रामीण चिकित्सा सहायकों की पदस्थापना कर उन्हें सहायक नोडल अधिकारी का प्रभार दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

विरोध के बाद भी बदला गया अहम पद

डॉक्टरों के अनुसार, उन्होंने पिछले महीने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर इन नियुक्तियों पर विरोध जताया था। इसके बावजूद पिछले सप्ताह स्टेट नोडल एजेंसी के एक महत्वपूर्ण पद से डॉक्टर को हटाकर वहां प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई। इस घटनाक्रम के बाद डॉक्टरों ने अपनी मांग दोहराई है। उनका कहना है कि संचालनालय में संचालक, अपर संचालक, संयुक्त संचालक और उप संचालक जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी एवं संवर्गीय पदों पर गैर-चिकित्सकीय संवर्ग के कनिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर जिम्मेदारी देने की मांग

डॉक्टरों ने मांग की है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर की जाएं। इसके लिए पात्र डॉक्टरों को पदोन्नति या चयन के माध्यम से जिम्मेदारी देने की मांग की गई है।डॉक्टरों के अनुसार, पहले संचालनालय में वरिष्ठता के आधार पर वरिष्ठ डॉक्टरों को प्रभारी संयुक्त संचालक और उप संचालक जैसे पदों की जिम्मेदारी दी जाती थी। अब इन पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियां बढ़ने से डॉक्टरों की पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।फिलहाल डॉक्टरों ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।