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धर्म डेस्क 12 अक्टूबर 2026: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता की आराधना से भक्तों को धैर्य, संयम, मानसिक शांति और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाने की परंपरा है। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक बताया गया है।
नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। माता को तपस्या, त्याग, संयम और सदाचार का प्रतीक माना जाता है। अगर आप भी इस दिन पूजा कर रहे हैं, तो जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, भोग और माता की आराधना का महत्व।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप शांत और तेजस्वी माना जाता है। उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके इसी तपस्विनी स्वरूप के कारण उन्हें मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
मान्यता है कि माता की पूजा से भक्तों में धैर्य, त्याग, संयम और सदाचार जैसे गुण विकसित होते हैं। उनकी आराधना व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर टिके रहने की प्रेरणा देती है।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक बताया गया है। इस दौरान भक्त विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ करें और शांत मन से माता का ध्यान करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के दूसरे दिन माता की पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं।
- स्नान और तैयारी: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की सफाई करें और मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- पंचामृत से अभिषेक: परंपरा के अनुसार, माता की प्रतिमा का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। अगर प्रतिमा पर अभिषेक संभव न हो, तो पंचामृत अलग पात्र में रखकर अर्पित कर सकते हैं।
- तिलक और फूल: माता को रोली, अक्षत और चंदन अर्पित करें। सफेद या सुगंधित फूल चढ़ाएं।
- भोग लगाएं: मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं। दूध से बनी मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।
- मंत्र जाप और आरती: माता के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद आरती उतारें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा गुड़, पंचामृत और दूध से बनी मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं।
कुछ भक्त माता को मखाने की खीर का भोग भी लगाते हैं। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
माता की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
- ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।
मंत्र जाप करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक माता का ध्यान करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में कौन सा रंग पहनें?
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में हरे या पीले रंग को भी महत्व दिया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और परिवार की पूजा परंपरा के अनुसार वस्त्रों का चयन कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से धैर्य, संयम और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। इन नौ दिनों में श्रद्धा और नियमपूर्वक माता की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।


