स्वतंत्र बोल
रायपुर 4 अक्टूबर 2026 : राजधानी रायपुर में डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया है। खमतराई थाना क्षेत्र के बजरंग नगर उरकुरा निवासी 64 वर्षीय किराना दुकानदार देवसिंह साहू को साइबर ठगों ने करीब डेढ़ महीने तक वीडियो कॉल और धमकियों के जरिए अपने जाल में फंसाए रखा। कभी खुद को CBI अधिकारी तो कभी IPS अधिकारी बताकर मनी लांड्रिंग के मामले में फंसाने और परिवार को गिरफ्तार कराने की धमकी दी गई। डर के चलते देवसिंह ने अपनी जमा पूंजी और सोने के जेवर बेचकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 8.50 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
मामले की शुरुआत 18 अगस्त को हुई। देवसिंह के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे एक महिला ने उन्हें फोन किया। महिला ने दावा किया कि उनके नाम से ICICI बैंक में खुले खाते में 6.80 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग हुई है। बातचीत के बाद महिला ने आदित्य नाम के व्यक्ति से उनकी बात कराई। उसने परिवार, जमीन और बैंक खातों से जुड़ी निजी जानकारी मांगी।
पहले महिला का फोन, फिर CBI अधिकारी बनकर बात
इसके बाद दूसरे मोबाइल नंबर से कॉल और वाट्सऐप कॉल आने लगी। कॉल करने वाले ने अपना नाम बलराज सिंह बताया और खुद को CBI अधिकारी बताया। उसने भी देवसिंह से निजी और पारिवारिक जानकारी ली।
कुछ समय बाद वीडियो कॉल पर प्रदीप सिंह नाम के व्यक्ति से बात कराई गई। उसने खुद को IPS अधिकारी बताया। प्रदीप ने कथित मनी लांड्रिंग का हवाला देते हुए देवसिंह को जेल भेजने की धमकी दी। साथ ही कहा गया कि जांच में सहयोग नहीं करने पर परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
हर घंटे वीडियो कॉल, पत्नी को भी बैठाने का दबाव
धमकियों के बाद देवसिंह को लगातार आरोपितों के संपर्क में रहने के लिए कहा गया। उन्हें हर घंटे वीडियो कॉल पर आने के निर्देश दिए जाते थे। कई बार उनकी पत्नी इंदु साहू को भी वीडियो कॉल के दौरान उनके सामने बैठने के लिए कहा गया।
देवसिंह के मुताबिक, 18 अगस्त से 3 सितंबर तक वीडियो कॉल के जरिए उन्हें इसी तरह डर में रखा गया। इसके बाद उनसे रकम जमा कराने की मांग शुरू हुई। ठगों ने कहा कि मनी लांड्रिंग से जुड़ी रकम के मिलान के लिए पैसे जमा कराने होंगे। रकम नहीं देने पर कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
4 सितंबर से शुरू हुए पैसों के ट्रांजेक्शन
4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच देवसिंह ने ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम भेजी। ज्यादातर ट्रांजेक्शन एक-एक लाख रुपए के थे। एक बार 50 हजार रुपए भी भेजे गए। इस तरह कुल 8.50 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए।
पुलिस को दिए बयान के मुताबिक, इस रकम में देवसिंह की जमा पूंजी भी शामिल थी। जब बैंक में उपलब्ध पैसे कम पड़ने लगे तो उन्होंने सोने के जेवर बेचकर रकम जुटाई। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही।
बेटे-बेटी को भी नहीं बताई पूरी बात
देवसिंह ने बताया कि आरोपित उन्हें लगातार यह कहते रहे कि मामला गंभीर है और किसी को जानकारी देने पर परिवार मुश्किल में पड़ सकता है। इसी डर के चलते उन्होंने अपने बेटे और बेटी को भी घटना के बारे में नहीं बताया।
जब पैसों की मांग लगातार बढ़ती गई तो 3 अक्टूबर को उन्होंने अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी बात बताई। भाई ने बातचीत और घटनाक्रम समझने के बाद इसे साइबर ठगी का तरीका बताया।
इसके बाद देवसिंह ने बैंक स्टेटमेंट, ठगों के साथ हुई चैट, मैसेज के स्क्रीनशॉट और रकम ट्रांसफर करने की रसीदें जुटाईं। 4 अक्टूबर को उन्होंने खमतराई थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। FIR में ठगी के दौरान इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल नंबरों के धारकों को संदिग्ध आरोपी बनाया गया है।
पुलिस इन मोबाइल नंबरों के साथ उन बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही है, जिनमें देवसिंह ने रकम ट्रांसफर की थी। जांच का फोकस ट्रांजेक्शन की कड़ियों और बैंक खातों के जरिए ठगी के नेटवर्क तक पहुंचने पर है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं और रकम आगे किन खातों में ट्रांसफर की गई।


