स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 29 सितंबर 2026: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा देने के कुछ ही दिनों बाद पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में अपने इस्तीफे और भविष्य की योजनाओं पर चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा कि वे वंचित लोगों की आवाज बनने के लिए राजनीति करेंगी। उन्होंने साफ किया कि उनकी यह राजनीति किसी राजनीतिक दल या झंडे के नीचे नहीं, बल्कि सीधे जनता के साथ होगी और वे देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब मांगेंगी।
‘नियम और बजट था, बस इरादा नहीं था’
दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर में अपनी तैनाती के दौरान लहुरिया दह की पहाड़ी का एक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि पानी की समीक्षा के दौरान एक महिला ने उनसे गांव में केवल 5वीं तक स्कूल होने और आगे पढ़ाई बंद होने का दर्द जताया। दिव्या ने नियम देखकर स्कूल स्वीकृत कराया, लेकिन तीन साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पैसा, नियम और स्वीकृति सब थी, तब भी काम नहीं हुआ क्योंकि इरादा नहीं था। अगर इरादा होता तो पहाड़ रास्ता देता, लेकिन इरादे के अभाव में फाइल ही पहाड़ बन गई।
‘संविधान में लोग सबसे ऊपर, फिर यह ऊपर वाला कौन?’
अपने प्रशासनिक अनुभवों का जिक्र करते हुए पूर्व आईएएस ने राजस्व विभाग के विशेष सचिव पद के दौरान का एक मामला बताया। एक भूमिहीन व्यक्ति पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर भटक रहा था। जांच रिपोर्ट गलत पाए जाने पर जब उन्होंने संबंधित जिले के अधिकारी से कब्जा दिलाने को कहा, तो जवाब मिला कि ‘ऊपर से मना किया गया है’। इस पर दिव्या मित्तल ने तीखा सवाल किया कि संविधान में जब सबसे ऊपर जनता है, तो फिर यह ‘ऊपर’ कौन है जिसकी वजह से लोगों को हक के लिए भटकना पड़ता है।
सड़क, गड्ढों में मौत और पेपर लीक पर उठाए तीखे सवाल
दिव्या मित्तल ने गांवों में सड़क, पुल न होने और सड़कों के गड्ढों के कारण होने वाली मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जब सिस्टम को सब पता होने के बाद भी फिक्र नहीं होती, तो मौत हादसा नहीं बल्कि फैसला होती है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, सालों तक अदालतों में लटकी भर्तियों और एआई (AI) के दौर में युवाओं के अनिश्चित भविष्य पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दो बेटियों की मां होने के नाते वे भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन किसी भी सदन में इन मुद्दों पर सोच और चर्चा नहीं हो रही है।
बिना किसी दल के उत्तर प्रदेश से करेंगी नई शुरुआत
राजनीतिक भविष्य पर स्थिति साफ करते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि जिन झंडों के नीचे 80 सालों में हिसाब नहीं बदला, वहां खड़े होकर हिसाब नहीं मांगा जा सकता। इसलिए वे किसी दल की सीढ़ी बनने के बजाय स्वतंत्र रूप से लोगों के साथ राजनीति करेंगी। उन्होंने एक बड़ी पार्टी के प्रवक्ता द्वारा रात के अंधेरे में दूसरी पार्टी के नेता से मिलने के दावों को झूठा करार दिया। उन्होंने अपनी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश से ही इस नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करने की घोषणा की और जनता से खुद पर भरोसा रखकर आगे आने का आह्वान किया।
कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए। pic.twitter.com/mtS6gzBzRw
— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) September 29, 2026


