2008 का कानून बदला, अब स्कूलों में बुर्का पूरी तरह बैन… जानिए इस फैसले का पूरा सच!

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 21 सितबंर 2026:

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इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने 20 सितंबर 2026 को रोम में अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा सम्मेलन में यह घोषणा की। प्रस्ताव में हर कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या की कानूनी सीमा तय करने और गंभीर रूप से एकीकरण की समस्या झेल रहे विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने की बात भी शामिल है। यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। इसे पहले सरकार और फिर संसद की मंजूरी लेनी होगी।

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मेलोनी ने बुर्का-नकाब का मुद्दा क्यों उठाया?

मेलोनी की घोषणा ऐसे समय हुई है जब इटली में 2027 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। उनके नेतृत्व वाली सरकार ने हाल के महीनों में प्रवासन और राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख और स्पष्ट किया है। 22-23 मार्च 2026 को हुए न्यायिक सुधार संबंधी जनमत संग्रह में मेलोनी सरकार के प्रस्ताव को करीब 54 प्रतिशत मतदाताओं ने खारिज कर दिया था। इसके बाद अगले आम चुनाव से पहले सरकार की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा तेज हुई। मेलोनी की नई घोषणा में स्कूलों को प्रवासन और एकीकरण की बहस के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने कहा है कि इटली आने वालों को देश की भाषा सीखनी चाहिए, संस्कृति को समझना चाहिए और नियमों का सम्मान करना चाहिए।

इटली में पहले से क्या नियम हैं?

इटली में बुर्का या नकाब पर देशभर में स्कूलों के लिए ऐसा प्रतिबंध अभी लागू नहीं है। 1975 के एक कानून के तहत ऐसे कपड़ों पर रोक है, जिनसे व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है, हालांकि इसमें उचित कारण के आधार पर अपवाद हैं। 2008 के एक फैसले ने स्पष्ट किया था कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से चेहरे को ढकने की अनुमति हो सकती है, लेकिन पहचान सत्यापन के समय चेहरा दिखाना जरूरी होगा। मेलोनी के प्रस्ताव के बाद अब स्कूलों में चेहरे को ढकने वाले परिधानों को लेकर अलग नियम बनाने की तैयारी है। सरकार की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून बनने के लिए संसद की मंजूरी भी जरूरी होगी।

विदेशी छात्रों की संख्या भी होगी सीमित

बुर्का और नकाब पर प्रस्तावित रोक के साथ मेलोनी ने हर कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करने की बात कही है। हालांकि उन्होंने अभी यह नहीं बताया है कि यह सीमा कितनी होगी। रॉयटर्स के मुताबिक इटली के स्कूलों में करीब 11.6 प्रतिशत छात्र गैर-नागरिक हैं। इटली में विदेशी छात्रों की संख्या को लेकर पहले से भी नियम मौजूद हैं। अलजजीरा के मुताबिक प्रति कक्षा और स्कूल विदेशी छात्रों के लिए 30 प्रतिशत की सीमा पहले से लागू है। ऐसे में नई व्यवस्था मौजूदा नियम में क्या बदलाव करेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। मेलोनी ने यह भी कहा है कि जिन विदेशी छात्रों को स्कूल व्यवस्था में गंभीर रूप से घुलने-मिलने में परेशानी हो रही है, उनके माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा।

इटली में मुस्लिम आबादी कितनी है?

इटली में मुस्लिम आबादी करीब 3 प्रतिशत होने का अनुमान एक अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में 2019 के IDOS आंकड़ों के हवाले से दिया गया था। इसमें करीब 17.3 लाख मुसलमानों का अनुमान लगाया गया था। प्रवासन और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दे इटली की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। 2022 के आम चुनाव में मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी को करीब 26 प्रतिशत वोट मिले थे और वह सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।

दुनिया के कई देशों में चेहरे ढकने पर प्रतिबंध

बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध को लेकर अलग-अलग देशों में अलग-अलग कानून हैं। कहीं पूरे सार्वजनिक स्थानों पर रोक है, तो कहीं सरकारी संस्थानों, स्कूलों या कुछ खास जगहों तक नियम सीमित हैं। इसलिए दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बताते समय प्रतिबंध के प्रकार को ध्यान में रखना जरूरी है। कुछ स्रोत कम से कम 24 देशों में चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर किसी न किसी तरह के प्रतिबंध का उल्लेख करते हैं। यूरोप में फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों में चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर अलग-अलग स्तर के प्रतिबंध हैं। इटली में भी कुछ स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रतिबंध रहे हैं, लेकिन स्कूलों में देशव्यापी बुर्का-नकाब प्रतिबंध के लिए मेलोनी सरकार अब नया प्रस्ताव ला रही है। एशिया और अफ्रीका के कुछ देशों में भी चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध या स्थानीय पाबंदियां हैं। इनमें चीन, श्रीलंका, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, चाड, कैमरून और ट्यूनीशिया जैसे देश शामिल हैं। इन सभी देशों में नियमों का दायरा एक जैसा नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

मेलोनी सरकार प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के सामने लाने की तैयारी कर रही है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसे संसद के सामने रखा जाएगा। संसद की मंजूरी के बाद ही यह कानून बन सकेगा। फिलहाल बुर्का और नकाब पर स्कूलों में देशव्यापी प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।