झीरम घाटी कांड में 10 को फांसी के फैसले के बाद बस्तर में बवाल, जानिए क्यों हर घर से 20 रुपये जुटा रहा आदिवासी समाज!

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स्वतंत्र बोल
जगदलपुर 19 सितम्बर 2026
झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए (NIA) कोर्ट द्वारा 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के फैसले के बाद आदिवासी समाज इसके विरोध में उतर आया है। बस्तर संभाग और आसपास के 6 से 7 जिलों के समाज प्रमुखों व प्रभावित परिवारों ने जगदलपुर के परपा में बैठक कर कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताया है। समाज का दावा है कि जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, वे निर्दोष ग्रामीण हैं और घटना में शामिल नहीं थे। समाज ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है।

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कानूनी लड़ाई के लिए हर घर से 20 रुपये चंदा जुटाएगा समाज

परपा में आयोजित बैठक में सर्व आदिवासी समाज ने निर्णय लिया कि इस कानूनी लड़ाई को लड़ने के लिए बस्तर के हर गांव और हर परिवार से 20-20 रुपये का चंदा जुटाया जाएगा। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे पहले एनआईए कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। यदि वहां से भी राहत नहीं मिलती है, तो वे मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे।

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गांव की बैठकों में जाना नक्सली होना नहीं: प्रकाश ठाकुर

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि प्रभावित परिवारों से चर्चा के बाद यह बात सामने आई है कि जेल में बंद लोग घटना के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों को आसपास के गांवों में होने वाली बैठकों में बुलाया जाता था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे नक्सली गतिविधियों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि झीरम की घटना बेहद दुखद है, लेकिन इसके नाम पर निर्दोष ग्रामीणों को आरोपी बनाकर जेल में बंद कर दिया गया है।

असली नक्सली जी रहे आराम की जिंदगी: गंगा नाग

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष गंगा नाग ने आरोप लगाया कि एनआईए की कार्रवाई में असली दोषी बच गए हैं। उन्होंने कहा कि घटना को अंजाम देने वाले असली नक्सली आज आराम की जिंदगी जी रहे हैं, जबकि बेकसूर ग्रामीणों को सजा दी गई है। इसी वजह से समाज एकजुट होकर पीड़ित परिवारों की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ने जा रहा है।

नए मोड़ पर पहुंची झीरम कांड की कानूनी लड़ाई

झीरम घाटी हत्याकांड के सालों बाद आए एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद अब स्थानीय आदिवासी समाज के खुलकर सामने आने से यह मामला एक नए कानूनी और सामाजिक मोड़ पर पहुंच गया है। चंदा जुटाकर उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी से बस्तर क्षेत्र में इस फैसले को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है।