स्वतंत्र बोल
रायपुर, 10 जून 2026: राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल देते हुए शिक्षा विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
लोक भवन में बुधवार को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने राज्यपाल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान राज्य के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की वर्तमान स्थिति, वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं और विद्यार्थियों को आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में राज्यपाल ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में विद्यालयों, छात्रावासों और अन्य आवश्यक अधोसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
राज्यपाल श्री डेका ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा, छात्रावास सुविधाओं, विद्यालयीन अधोसंरचना और शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों का संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराकर ही इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक विकास की सबसे मजबूत नींव है, इसलिए विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सभी आवश्यक संसाधन और सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। राज्यपाल के निर्देशों के बाद अब शिक्षा विभाग से इन क्षेत्रों में सुधारात्मक कदमों को तेज किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।


