रेप के बाद मां नहीं बनना चाहती थी युवती! हाईकोर्ट पहुंची पीड़िता, फिर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर, 22 मई 2026:। दुष्कर्म की वजह से गर्भवती हुई एक युवती को आखिरकार हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीड़िता की याचिका स्वीकार करते हुए उसे गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि रेप पीड़िता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह गर्भ जारी रखना चाहती है या नहीं।

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मामले की सुनवाई के दौरान युवती ने कोर्ट को बताया कि वह जबरन बनाए गए शारीरिक संबंधों के कारण गर्भवती हुई है और इस प्रेग्नेंसी से उसे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की तकलीफ हो रही है। उसने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती जिसने उसकी सहमति के बिना उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे समाज में अपमान और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

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पीड़िता ने अपनी याचिका में मांग की थी कि मेडिकल विशेषज्ञों की टीम गठित कर उसकी जांच कराई जाए और जल्द से जल्द गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे सिम्स बिलासपुर में भर्ती कराया जाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाकर मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।

सुनवाई के बाद जस्टिस एन के व्यास की वेकेशन बेंच ने कहा कि रेप पीड़िता को अपने शरीर और भविष्य को लेकर फैसला लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। कोर्ट ने माना कि पीड़िता 14 से 16 सप्ताह की गर्भवती है और न्यायिक अनुमति के बिना डॉक्टर गर्भपात नहीं कर सकते थे।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पीड़िता को सिम्स या जिला अस्पताल बिलासपुर में सभी जरूरी सुविधाओं के साथ भर्ती करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने को भी कहा है ताकि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया के दौरान जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।

कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिका मंजूर कर ली। इस फैसले को पीड़िता के अधिकारों और उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।