गांव-गांव में बंट रही ‘सुपोषण किट’… मां और बच्चों को लेकर सरकार की इस नई मुहिम ने बढ़ाई हलचल

स्वतंत्र बोल
रायपुर ,10 मई 2026
: छत्तीसगढ़ में इन दिनों चल रहे सुशासन तिहार के बीच अब सरकार का पूरा फोकस माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। गांवों में लग रहे शिविरों में सिर्फ शिकायतें नहीं सुनी जा रहीं, बल्कि अब लोगों को ऐसी चीजें दी जा रही हैं, जो सीधे उनके स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ी हैं। कई इलाकों में गर्भवती और धात्री माताओं को विशेष “सुपोषण किट” बांटे जाने के बाद यह अभियान तेजी से चर्चा में आ गया है।

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राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम आसरा में आयोजित शिविर में उस समय अलग ही माहौल देखने को मिला, जब गर्भवती और शिशुवती माताओं को सुपोषण के प्रति जागरूक करते हुए विशेष किट वितरित किए गए। हितग्राही श्रीमती महेश्वरी साहू और श्रीमती पुष्पलता साहू ने कहा कि यह सहायता उनके बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी साबित होगी।

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महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस अभियान का मकसद सिर्फ किट बांटना नहीं, बल्कि गांव-गांव में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। “पोठ लईका अभियान” के तहत पालक चौपाल आयोजित कर माताओं को संतुलित और पौष्टिक आहार की जानकारी दी जा रही है।

शिविरों में “सुपोषण कलश” के जरिए स्थानीय खाद्य पदार्थों के महत्व को भी समझाया जा रहा है। खासतौर पर मुनगा, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और प्रोटीनयुक्त भोजन को रोजमर्रा के खानपान में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा “तिरंगा भोजन” की अवधारणा को लेकर हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक इस तरीके से लोगों को आसान भाषा में समझाया जा रहा है कि थाली में अलग-अलग रंगों के भोजन शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है। ग्रामीण महिलाओं में इसे लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।

सुशासन तिहार के तहत लगाए जा रहे इन शिविरों का असर अब दूर-दराज के इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। जहां पहले पोषण और स्वास्थ्य को लेकर जानकारी की कमी थी, वहां अब महिलाएं खुद आगे बढ़कर सवाल पूछ रही हैं और बच्चों के खानपान पर ध्यान देने लगी हैं।

सरकार का दावा है कि यह अभियान आने वाले समय में कुपोषण कम करने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार योजनाओं का लाभ सीधे गांव तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।