स्वतंत्र बोल
रायपुर 05 मई 2026. माना स्थित बाल संप्रेषण गृह में किशोर के पैर टूटने की घटना पर लीपापोती चल रही है। विभागीय अधिकारियो के द्वारा जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश हो रही है। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी सोमवार माना स्थित बाल संप्रेषण गृह जाँच करने पहुंचे थे, वहा चोटिल किशोर से पूछताछ की। संप्रेषण गृह के सूत्रों के अनुसार किशोर को बयान बदलने दबाव बनाया गया, उसे कबड्डी खेलने के दौरान पैर टूटना लिखवाया गया। दरअसल महिला बाल विकास के जिम्मेदार अधिकारी शुरू से बड़ी घटना को दबाने में जुटे थे, स्वतंत्र बोल द्वारा खबरे प्रकाशित होने पर जिम्मेदारों को नोटिस जारी किया गया, जिसकी मियाद सोमवार को समाप्त हो गई। अधीक्षिका रीता चौधरी और परिवीक्षा अधिकारी (संविदा) मनीष सोनी को नोटिस जारी किया गया था, उनके द्वारा क्या जवाब दिया गया स्पष्ट नहीं हुआ है पर लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
बाल संप्रेषण गृह माना में पहले भी कई गंभीर घटनाये हो चुकी है। कई युवक वह की खिड़की तोड़कर भागे भी थे, बाल गृह से वीडियो बनकर सोशल मीडिया में वायरल भी किया गया था। इसके आअलावा और कई गंभीर घटनाये हो चुकी है, पर जिम्मेदारों को नोटिस जारी सिर्फ खानापूर्ति की की जाती रही है।
संप्रेषण गृह में बच्चे का पैर टूटा, अधीक्षिका व परिवीक्षा अधिकारी को नोटिस.. जिम्मेदारी किसकी ?
संप्रेषण गृह में बच्चे का पैर टूटा, अधीक्षिका व परिवीक्षा अधिकारी को नोटिस.. जिम्मेदारी किसकी ?


