वाराणसी। काशी की धरती से एक बार फिर सियासत का तापमान अचानक बढ़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से ऐसी बातें कही, जिसने महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। लगभग 6,350 करोड़ रुपये के विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने पहुंचे प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सीधे विपक्षी दलों पर हमला बोला और कहा कि दशकों से बहनों का अधिकार जानबूझकर रोका गया।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि नई संसद के गठन के बाद उनकी सरकार का पहला बड़ा फैसला महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। उन्होंने याद दिलाया कि यह अधिकार करीब 40 वर्षों तक अटका रहा और 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए इसे पारित कराया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कानून बनने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया में विपक्षी दलों ने फिर अड़ंगा डालने की कोशिश की।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों का नाम लेते हुए कहा कि इन पार्टियों ने बार-बार महिलाओं को उनका हक देने में बाधा डाली। उन्होंने इन दलों को परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति में डूबा बताते हुए कहा कि असल डर यह है कि अगर जमीनी स्तर पर काम करने वाली बेटियां सत्ता के उच्च स्तर तक पहुंच गईं, तो इन दलों का नियंत्रण खत्म हो जाएगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश की बेटियां अब पंचायत से लेकर कॉलेज कैंपस तक नेतृत्व कर रही हैं और अपनी पहचान बना रही हैं। ऐसे में अगर उन्हें विधानसभा और संसद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल गया, तो पारंपरिक राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। यही कारण है कि कुछ दल इस बदलाव से घबराए हुए हैं।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में करीब 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। इन समूहों को वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक 3 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो इस बदलाव की बड़ी मिसाल है।
सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं को केंद्र में रखकर कई फैसले किए। देशभर में 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए, 30 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, करोड़ों घरों में बिजली पहुंचाई गई और नल से जल की सुविधा दी गई। उनका कहना था कि इन सभी योजनाओं का मकसद महिलाओं को सुविधा, सुरक्षा और सम्मान देना है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि देश की महिलाएं अब सब समझ चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में हाल ही में मतदान हुआ है, वहां महिलाओं ने रिकॉर्ड वोटिंग कर यह संकेत दे दिया है कि वे अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े दलों को जवाब देने के लिए तैयार हैं।
काशी से दिया गया यह बयान सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले समय में महिला आरक्षण और राजनीतिक समीकरणों को लेकर एक बड़े सियासी संघर्ष का संकेत माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मुद्दे पर विपक्ष किस तरह जवाब देता है और क्या यह बहस देश की राजनीति को नया मोड़ देगी।
