स्वतंत्र बोल
रायपुर 28 अप्रैल 2026. महिला बाल विकास में साडी खरीदी में कमीशनखोरी को लेकर हंगामा मचा हुआ। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने लंबाई में कम और गुणवत्ताहीन साड़ियों को वापस मंगाने और सप्लायर का पैसा रोकने का निर्देश जारी, पर अभी तक जिम्मेदारी तय नहीं हो पाया है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? दिसंबर 2025 में साड़ियों की क्वालिटी को लेकर शिकायते संचालक तक पहुंची, जनवरी 2026 में जाँच समिति बनाई गई और फरवरी अंत तक समिति ने रिपोर्ट भी सौप दिया। जिसके बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में शिकायतों के समाधान और संभावित कमीशनखोरी के आरोपों से बचने दिलदार सिंह मरावी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई गई थी.. उसके बाद भी अभी तक शिकायत वाले जिलों से साड़ीयां वापस नहीं हुई है और विभाग ने साल 2025-26 में बंटने वाले साड़ियों के वितरण पर रोक लगा दिया है।
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जिम्मेदार कौन ?
महिला बाल विकास में सप्लाई और ठेके में वर्षो से खेल होता रहा है, पर इस बार सप्लायर और अधिकारियो ने महिलाओ के अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर दिया। सामग्री खरीदी के पहले क्रय समिति बनती है और सामने का प्री और पोस्ट इंस्पेक्शन होता है। दस करोड़ की साड़ी खरीदी में कमीशनखोरी ने बीजेपी के महतारी वंदन योजना को पीछे छोड़ दिया है जिसमे सरकार प्रति महीने करीब 700 करोड़ का भुगतान महिलाओ को करती है। दस करोड़ की साडी महतारी वंदन पर भारी पड़ गई, जीरो टॉलरेंस और मितव्ययिता का नारा देने वाले बीजेपी सरकार की छवि को एक झटके में धूमिल करने का प्रयास हुआ उसके बाद भी अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?
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