स्वतंत्र बोल
बिलासपुर,26 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के चर्चित DMF घोटाले में उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले ने साफ संकेत दे दिया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी तरह की राहत देना फिलहाल संभव नहीं है।
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बिलासपुर में जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरोपी की भूमिका, अपराध की गंभीरता और उसके प्रभावशाली पद को देखते हुए उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी माना कि रिहा होने की स्थिति में आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों को प्रभावित कर जांच को प्रभावित कर सकता है।
मामला कोरबा जिले के डिस्ट्रीक्ट मिनरल फंड (DMF) में हुए कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। जांच एजेंसियों—ईओडब्ल्यू और एसीबी—ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 23 फरवरी 2026 को अनिल टुटेजा को गिरफ्तार किया था। उस समय वे इंडस्ट्री विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी के पद पर थे।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस घोटाले में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि केस डायरी से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि सप्लायर्स के साथ मिलकर अवैध कमीशन का खेल चला, जिसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए लगभग 16 करोड़ रुपये का गैरकानूनी कमीशन लिया गया, जिसमें से हिस्सा आरोपी तक भी पहुंचा।
बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अन्य सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अन्य आरोपियों ने लंबी अवधि जेल में बिताई है, जबकि वर्तमान आरोपी अभी केवल दो महीने से ही जेल में है, इसलिए पैरिटी का दावा नहीं बनता।
साथ ही, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ट्रायल में देरी होना जमानत का स्वतः आधार नहीं बनता। मामले में कई गवाहों और दस्तावेजों की जांच बाकी है, ऐसे में आरोपी की कस्टडी जरूरी है।
इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि DMF घोटाले में जांच एजेंसियां और न्यायालय दोनों सख्त रुख अपनाए हुए हैं। फिलहाल अनिल टुटेजा को जेल में ही रहना होगा और अब सबकी नजर इस केस के ट्रायल और आगे होने वाले खुलासों पर टिकी है।
