महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज: छत्तीसगढ़ में विशेष सत्र की तैयारी, बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने

स्वतंत्र बोल 
रायपुर 22 अप्रैल 2026:  महिला आरक्षण को लेकर देशभर में सियासी बहस तेज हो गई है और अब इसका असर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी साफ दिखाई दे रहा है। संसद में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) कांग्रेस पर हमलावर है और उसे महिला विरोधी करार दे रही है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएगी। सरकार का आरोप है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण को रोककर देश की आधी आबादी के साथ अन्याय किया है।

बीजेपी पहले ही इस मुद्दे पर सड़क पर ‘महिला आक्रोश रैली’ निकाल चुकी है और अब सदन के भीतर कांग्रेस को घेरने की रणनीति बना रही है।

वहीं विपक्ष भी इस हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने सरकार के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है तो उसे एक दिन की बजाय दो दिन का किया जाए। उन्होंने कहा कि एक दिन सरकार कांग्रेस की आलोचना कर ले, लेकिन दूसरे दिन कांग्रेस को भी अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए।

इस बीच प्रदेश सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष दबाव में काम कर रहे हैं और कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति भी ठीक नहीं है।

महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सियासत के इस टकराव ने आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र को और भी अहम बना दिया है। अब देखना होगा कि इस बहस में किसका पक्ष जनता के बीच ज्यादा प्रभावी साबित होता है।