बंदूक की छाया से निकलकर ‘दिमाग की जंग’ में बस्तर के बच्चे, शतरंज की बिसात पर चुपचाप रच दी नई कहानी

स्वतंत्र बोल 
बस्तर, 20 अप्रैल 2026:  जिस जमीन को कभी गोलियों की आवाज और खौफ के साए के लिए जाना जाता था, वहीं अब शतरंज की खामोश चालों ने एक नई कहानी लिख दी है। जगदलपुर के निर्मल विद्यालय में आयोजित द चेस नेशन शतरंज चैम्पियनशिप 2026 का समापन सिर्फ एक प्रतियोगिता का अंत नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की एक मजबूत दस्तक बनकर सामने आया।

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प्रदेशभर से पहुंचे खिलाड़ियों के बीच मुकाबला जितना शांत दिख रहा था, उतना ही अंदर से रोमांच और दबाव से भरा हुआ था। हर चाल के साथ जैसे जीत और हार के बीच एक अदृश्य जंग चल रही थी। इस जंग में रायपुर के सालिक नवाज मणिहार ने ओपन वर्ग में पहला स्थान हासिल कर ₹11 हजार अपने नाम किए, जबकि बिलासपुर के रूपेश कुमार मिश्रा दूसरे और दुर्ग के यशद बंबेश्वर तीसरे स्थान पर रहे।

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महिला वर्ग में अलंक्रुता मोहराना ने अपनी रणनीति और धैर्य से सभी को पीछे छोड़ते हुए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब अपने नाम किया। लेकिन असली चौंकाने वाली तस्वीर जूनियर वर्ग में देखने को मिली, जहां नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों ने अपनी प्रतिभा से सबको हैरान कर दिया।

अंडर-15 वर्ग में कोंडागांव के मयंक श्रीवास्तव ने ऐसी बाजी खेली कि विरोधी खिलाड़ी संभल ही नहीं पाए। वहीं जगदलपुर के एजीकियल सर्विन एक्का दूसरे और अथर्व मेश्राम तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में आयुषी राठी ने बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई।

अंडर-11 वर्ग में जगदलपुर के अयांश दीक्षित ने जिस आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया, उसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। वेदांत शुक्ला दूसरे और सिद्धार्थ राव तीसरे स्थान पर रहे, जबकि बालिका वर्ग में बृष्टि साहा ने शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि बस्तर अब धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़ रहा है। यहां के युवा अब बंदूक की राह नहीं, बल्कि बुद्धि और हुनर के दम पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बस्तर की नई पीढ़ी खामोश जरूर है, लेकिन उनकी चालें इतनी तेज हैं कि पूरा प्रदेश अब उनकी तरफ देखने को मजबूर हो गया है।