स्वतंत्र बोल
रायपुर, 09 अप्रैल 2026:रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय उच्चस्तरीय बैठक में उस समय हड़कंप मच गया जब विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान कई जिलों की गंभीर लापरवाही उजागर हो गई। आदिम जाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग की इस अहम बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने की, जहां योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट उपयोग की गहन समीक्षा की गई।
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बैठक के दौरान सामने आया कि कुछ जिलों ने आवंटित बजट का सही उपयोग नहीं किया, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रमुख सचिव ने बलौदाबाजार, बेमेतरा, जशपुर और बिलासपुर के सहायक आयुक्तों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इस फैसले के बाद विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है।
प्रमुख सचिव बोरा ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आगामी शैक्षणिक सत्र को देखते हुए आश्रम और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। अगले दो महीनों के भीतर छात्रावासों में मरम्मत, रंग-रोगन, स्वच्छ शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर अग्निशमन यंत्र और सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में “प्रोजेक्ट संकल्प” को लेकर भी अहम फैसले लिए गए। इसके तहत छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ध्यान और योग को शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि उनका मानसिक और नैतिक स्तर मजबूत हो सके। इसके अलावा सेप्टिक टैंक की सफाई को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए कि मैनुअल सफाई पूरी तरह बंद कर मशीनों के माध्यम से ही कार्य कराया जाए।
छात्रवृत्ति योजना की समीक्षा के दौरान विभाग ने संतोष जताया। जानकारी दी गई कि पिछले सत्र में 3.3 लाख छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति राशि उनके खातों में ट्रांसफर की गई। अब इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की तैयारी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।
वन अधिकार अधिनियम के लंबित मामलों पर भी प्रमुख सचिव ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि सभी प्रकरणों का 15 दिनों के भीतर ग्राम सभाओं के माध्यम से निराकरण किया जाए। निर्माण कार्यों में देरी पर भी सख्ती दिखाते हुए समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि नए छात्रावासों के प्रस्ताव भेजने से पहले स्थल निरीक्षण अनिवार्य होगा, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो। वहीं बस्तर क्षेत्र में पूर्व से प्रस्तावित छात्रावासों के निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
पूरे घटनाक्रम के बाद विभाग में एक तरह का डर और दबाव साफ नजर आ रहा है, जहां अब हर स्तर पर जवाबदेही तय करने की तैयारी है।
