स्वतंत्र बोल
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बिलासपुर 09 अप्रैल 2026। मध्यप्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान में रिसॉर्ट बनाने का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित कारोबारी 7 साल तक ठगों के झांसे में फंसा रहा और पुलिस के पास जाने के बाद भी उसे तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
मिनोचा कॉलोनी निवासी कारोबारी विकास चंदेल को 2017 में दीपेंद्र पाणी और कुसमाकर भोंसले ने कान्हा में “आइसलैंड रिसॉर्ट” बनाने का लालच दिया। जमीन और प्रोजेक्ट के नाम पर एग्रीमेंट कर दोनों ने अलग-अलग किस्तों में उससे कुल 3 करोड़ 15 लाख रुपये ले लिए।
7 साल तक चलता रहा खेल… न जमीन, न रिसॉर्ट
समय बीतता गया, लेकिन न तो रिसॉर्ट बना और न ही कोई काम शुरू हुआ। जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। आखिरकार उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने थाने का दरवाजा खटखटाया।
लेकिन यहां भी उसे निराशा हाथ लगी। पुलिस ने मामले को आपसी लेनदेन बताकर कोर्ट जाने की सलाह दे दी। इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट में परिवाद दायर किया।
कोर्ट के आदेश से खुला मामला
कोर्ट के सख्त रुख के बाद पुलिस हरकत में आई और सिविल लाइन थाने को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। आदेश मिलते ही धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
एक ही रात में दबोचे गए आरोपी
पुलिस ने तेजी दिखाते हुए एक ही रात में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दीपेंद्र पाणी को रायपुर के राजेंद्र नगर इलाके से पकड़ा गया, जबकि कुसमाकर भोंसले सरोरा गांव में किराए के मकान में छिपा हुआ था।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने ठगी की बात कबूल कर ली। बताया गया कि दीपेंद्र रायपुर में ‘पाणी कंसलटेंट’ नाम से एजेंसी चलाता था, जबकि दूसरा आरोपी अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
निष्कर्ष:
यह मामला न सिर्फ करोड़ों की ठगी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि समय पर कार्रवाई न होने से पीड़ित को कितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की जांच जारी है।
