स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 सितंबर 2025. राजधानी के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विभिन्न ब्रांचो में हुए करीब 10 करोड़ से अधिक के गबन मामले में बैंक प्रबंधन एक बार फिर सवालो में है। बैंक की उपसमिति द्वारा 30 अप्रैल 2025 को लिए निर्णय अनुसार दर्जन भ्रष्ट और दोषी बैंकर्मियो पर कार्यवाही का प्रस्ताव पारित किया था। उसके बाद भी अब तक आधा दर्जन आरोपित बैंकर्मियो पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
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विभागीय जानकारी अनुसार 30 अप्रैल 2025 को बैंक के संचालक मंडल के उपसमिति की बैठक में चंद्रशेखर डग्गर, संजय शर्मा, विजय कुमार वर्मा, घनश्याम देवांगन, सूरज साहू एवं पंकज सराफ को सेवा से बर्खास्त किया गया तथा कर्मचारी अशोक पटेल, शारदा शर्मा एवं प्रकाश गवारले को पदावनत किया गया था। करीब दर्जन भर कर्मियों की वेतनवृद्धि रोकी गई थी। बैंक घोटाले में शामिल मोहन साहू और स्मिता अखिलेश सहित आधा दर्जन बैंक कर्मी घोटाले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल है। 30 अप्रैल की बैठक में स्मिता अखिलेश और मोहन साहू दोनों ही छुट्टी का आवेदन देकर नदारद हो गए थे, उसके चार महीने बाद भी बैंक प्रबंधन अब तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाया है।
महासमुंद मुख्यालय पर रायपुर में डेरा-
बैंक की सीईओ श्रीमती अपेक्षा व्यास ने घोटाले में शामिल बैंककर्मी मोहन साहू का तबादला महासमुंद जिला सहकारी बैंक में किया था, पर वह राजधानी में डेरा जमाये रहता है। बताते है मोहन राजधानी में घूम घूम कर राजनीती चमकाने और सीनियर अधिकारी की मंत्री विधायकों से शिकायते करता रहता है। कुछ दिनों पहले मोहन मदकू में आरएसएस के बड़े नेता के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भी शामिल होने पंहुचा था।
सीईओ दुर्ग वापसी की राह में-
जिला सहकारी बैंक की सीईओ श्रीमती अपेक्षा व्यास अपने गृह शहर दुर्ग में वापसी के रास्ते बना रही है। जिला सहकारी बैंक दुर्ग के सीईओ एसके जोशी इस महीने के अंतिम में रिटायर हो रहे है ऐसे में अपेक्षा एक बार फिर दुर्ग जाने बेचैन है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इसके लिए उन्होंने बैस परिवार से जुड़े नेता और किसी अखिलेश तिवारी नामक व्यक्ति को साधा है।
दरअसल श्रीमती व्यास के सर्विस का आधे से ज्यादा समय जिला सहकारी बैंक दुर्ग में व्यतीत हुआ है, उनका गृह जिला भी है। जिससे बैंक ग्राहक, कर्मचारी, कारोबारी, सप्लायर और स्थानीय नेताओ से अच्छे संबंध है। दुर्ग में रहते ही उन पर करोडो रुपये के घोटाला करने के आरोप स्थानीय सहकारी बैंको में पदाधिकारियों ने लगाया था, जिसकी जाँच वर्षो से चल रही पर जाँच अधिकारी श्रीवास्तव जाँच पूरी नहीं कर पा रहे। श्रीवास्तव की छवि सख्त बैंक अधिकारी की रही पर जाँच के नाम की जा लीपापोती ने उनके कार्यो पर सवाल उठाया है।
