ओम हॉस्पिटल की लापरवाही से चली गई महिला की जान

स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 अगस्त 2025: राजधानी रायपुर के प्राइवेट अस्पताल आजकल कमाई का जरिया बन गए है। जहां पहले डॉक्टर को भगवान की संज्ञा दी जाती थी आज वही डॉक्टर चंद पैसों के लालच में कसाई बनते जा रहे है। बीते दिनों एक घटना ओम हॉस्पिटल जो की राजधानी के रायपुरा में मौजूद है, वहां से सामने आई थी। एक महिला जिनका नाम सीमा उपाध्याय उनके पैर में चोट लगी। इलाज के नाम पर ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन सक्सेसफुल नहीं रहा। मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया और फिर मरीज की मौत हो गई। परिवार वाले का कहना है कि जब समय अधिक हुआ तो कारण पूछा गया। जिसपर हॉस्पिटल प्रबंधन ICU को लॉक करके रखा। कई घंटे बीत जाने के बाद ये बताया गया कि मरीज की मौत हो गई।

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इतना सुनने के बाद परिवारवाले आक्रोशित हुए जिसपर हॉस्पिटल प्रबंधन ने कहा आप लोगों को यदि विश्वास नहीं है हमलोग खुद पोस्टमार्टम कराएंगे। परिवार वाले विरोध किये तो हॉस्पिटल डेडबॉडी देने से मना करने लगा जिसके बाद परिवारजन DD नगर थाने पहुंचे। थाने पहुंचने के बाद पूरा मामला थाने में बतया गया जिसके बाद पुलिस की पीसीआर वैन साथ आई और फिर शव को एम्स तक पहुंचाई। स्वतंत्र बोल तक जब खबर पहुंची तो हम मृतक परिवार से बात किये जिसके बाद ओम हॉस्पिटल की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैया सामने आया।

पूरे मामले को समझिए मामला क्या है

सीमा उपाध्याय जो की राजधानी रायपुर की रहने वाली कुछ दिन पहले उड़ीसा के पुरी गई हुई थी। जहां समुद्र के किनारे वह गिर गई। उनके पैर में चोट आई और परिवारवाले सीमा को 7 अगस्त को रायपुरा के ओम हॉस्पिटल लेकर गए। जहां 11 अगस्त को सर्जरी का दिन निर्धारित हुआ। परिवारवालों का यह भी आरोप है कि आयुष्मान कार्ड को भी हॉस्पिटल स्वीकार नहीं कर रहा था। सर्जरी वाले दिन सुबह हॉस्पिटल से सुबह 8 बजे के आसपास फ़ोन आता जिसके बाद मृतिका का बेटा 20 हजार कैश ले जाकर जमा करता है। ऐसे में सवाल उठता आखिर जिस आयुष्मान कार्ड को पूरे देश के नामी अस्पतालों में मान्य किया गया वहाँ पर ओम हॉस्पिटल जैसे बड़े अस्पताल मनमानी क्यों करते है? आखिर इनको किसका सह है? इन अस्पतालों की मनमानी पर जाँच होनी चाहिए।