CGMSC SCAM: घोटाले में शामिल अधिकारियो की नींद उडी, अधिकांश छुट्टी पर.. बचाव के रास्ते तलाशे जा रहे।

स्वतंत्र बोल
रायपुर 10 फरवरी 2025.  छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) में दवा खरीदी और सप्लाई में हुए घोटाले में ईओडब्लू द्वारा की जा रही कार्यवाही के बाद घोटाले में शामिल अधिकारियो की नींद उडी हुई है। कार्यवाही की चपेट से बचने अधिकारी सुरक्षित छत ढूंढ रहे है, जिसके सहारे अपना दामन बचा सके। सप्लायर कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक ने ईओडब्ल्यू को पूछ्ताछ में घोटाले में शामिल अधिकारियो के नाम बताया था, जिसके बाद संबंधित अधिकारियो से पूछताछ की गई थी। विश्वश्त जानकारिनुसार ईओडब्ल्यू तत्कालीन जीएम रहे बसंत कौशिक, वर्तमान जीएम कमलकांत पाटनवार, वित्त अधिकारी रही मीनाक्षी गौतम, बायो मेडिकल इंजीनियर क्षीरोद्र रावटिया,जीएम मेडिसिन हिरेन मनुभाई पटेल और स्वास्थ्य विभाग के उपसंचालक आनंद राव व डॉ अनिल परसाई से पूछताछ कर चुकी है। उनसे मिली जानकारी अनुसार स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन संचालक भीमसिंह और सीजीएमएससी के एमडी रहे चंद्रकांत वर्मा और पद्मनी भोई साहू को पूछताछ के लिए नोटिस जारी जारी किया था।

दवा घोटाले की STORY: ऐसे हुआ दवा निगम में करोडो का घोटाला, मोक्षित की मोनोपली, कमीशन के लालच में चुप रहे अधिकारी.. इनकी संलिप्तता

अधिकारियो की सेहत ख़राब!


विधानसभा के शीतकालीन सत्र में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा ईओडब्लू द्वारा जाँच कराने की घोषणा करने पर तत्कालीन एमडी रहे अधिकारी को दौरा पढ़ा था, 20 दिनों तक हॉस्पिटल में रहने के बाद काम पर लौटे थे। मोक्षित कारपोरेशन के संचालक की गिरफ्तारी के बाद अधिकारियो में लगातार बैठकों का दौर जारी है। शुक्रवार को भी अधिकारियो ने लंबी बैठक की। वर्तमान में अधिकारियो को नोटिस जारी होने के बाद सभी छुट्टी पर चले गए है, बताते है कि एक अधिकारी ने अपने पिता जी के गुजर जाने का हवाला देकर छुट्टी लिया है, एमडी पद्मनी भोई साहू 10 फरवरी तक छुट्टी पर है.. बाकी अधिकारी रास्ता तलाश रहे है। विधानसभा के बजट सत्र में फिर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन चर्चा का विषय रहेगा।

उधर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अपने ऑफिस में चौकसी बढ़ा दी है। आने जाने वालो का नाम पता और मिलने का समुचित कारण रजिस्टर में एंट्री करने के बाद ही कार्यलय में प्रवेश दिया जा रहा है। इसके लिए सुरक्षागार्ड के साथ एक सविंदाकर्मी क्लर्क को तैनात किया गया है। कर्मचारियों के अनुसार ऐसी व्यवस्था 09 जनवरी से शुरू की गई जबकि चौकसी एफआईआर दर्ज होने के बाद बढ़ाई गई।

 

अय्याश उपायुक्त की जाँच में गोलमाल- स्वास्थ्य सचिव ने कंट्रोलर को लिखा, अब कंट्रोलर ने डीएचएस को लिखा.. सवाल- महिला संबंधी आरोपों पर ढिलाई क्यों ?