स्वतंत्र बोल
लखनऊ 30 सितम्बर 2026 : यूपी में इन दिनों 308 पहियों वाला एक ‘महाबली’ ट्रक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ओडिशा से लखीमपुर जा रहे इस ट्रक पर बेल्जियम का 164 टन वजनी वेसल यानी वैक्यूम बॉयलर लदा है। यह मशीन समुद्री रास्ते से ओडिशा के पारादीप तट तक पहुंची थी। इसके बाद इसे मल्टी एक्सल ट्रक पर लादकर लखीमपुर की कुंभी चीनी मिल ले जाया जा रहा है। झारखंड और बिहार से होते हुए काफिला अब वाराणसी पहुंच चुका है। गंतव्य तक पहुंचने में करीब दो सप्ताह और लगने की बात बताई गई है।
इस भारी-भरकम काफिले के रास्ते में कई जगह सड़क की व्यवस्था बदलनी पड़ रही है। कहीं फुट ओवरब्रिज को अस्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया चल रही है, तो कहीं बड़े होर्डिंग और पेड़ हटाए जा रहे हैं। संकरी सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। बिजली के तार, खंभे और साइनेज भी हटाने पड़ रहे हैं।
62 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम साथ
इस मशीन को यूरोप से भारत लाने और गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जे.एम बक्शी हैवी कंपनी निभा रही है। कंपनी के कर्मचारी ही पूरे काफिले के साथ चल रहे हैं।
ओडिशा से निकलने के बाद करीब 62 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम इस सफर में शामिल है। पूरा काफिला किसी चलते-फिरते मोहल्ले की तरह नजर आता है। कर्मचारी रास्ते में साथ ही खाते-पीते और आराम करते हैं।
तीन अतिरिक्त इंजन भी साथ
308 पहियों वाले इस मल्टी एक्सल ट्रक को खींचने के लिए तीन अतिरिक्त इंजन भी साथ चल रहे हैं। समतल रास्ते पर एक इंजन से ट्रक आगे बढ़ता है। चढ़ाई वाले रास्ते पर जरूरत के हिसाब से एक से ज्यादा इंजन की मदद ली जाती है।
बेल्जियम से उत्तर प्रदेश तक इस मशीन को लाने में अब तक करीब छह महीने लग चुके हैं। इसमें लगभग चार महीने का समय सिर्फ ओडिशा के बंदरगाह से आगे के सफर में लगा है।
100 फीट लंबा और 7 मीटर चौड़ा काफिला
यह विशाल ट्रक करीब 100 फीट लंबा और 7 मीटर चौड़ा है। इसके रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटाने के लिए जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस, बिजली विभाग और NHAI की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
काफिले में 60 से अधिक इंजीनियर और कर्मचारी शामिल हैं। इनके साथ दो अतिरिक्त ट्रेलर और दो क्रेन भी चल रहे हैं।
वाराणसी में भी हटाए जा रहे फुट ओवरब्रिज
वाराणसी में डाफी टोल प्लाजा के पास सड़क को चौड़ा किया गया है। यहां तीन फुट ओवरब्रिज को अस्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
इससे पहले बिहार के कैमूर में भी काफिले के लिए रास्ता बनाने के दौरान पुल का कुछ हिस्सा तोड़ना पड़ा था। संकरी सड़कों पर जगह बनाने के लिए निर्माण कार्यों को हटाने का काम भी जारी है।
रोज सिर्फ 10 से 12 किलोमीटर चल पा रहा ट्रक
इतने बड़े काफिले की वजह से सफर की रफ्तार भी काफी कम है। रास्ते में आने वाली बाधाओं के कारण ट्रेलर रोजाना करीब 10 से 12 किलोमीटर ही आगे बढ़ पा रहा है। साफ रास्ता मिलने पर इसकी रफ्तार करीब 20 किलोमीटर प्रतिदिन तक रहती है।
ट्रक पर करीब 30 लोगों के खाने-पीने और रहने का इंतजाम भी साथ चल रहा है। रात में जहां काफिला रुकता है, वहीं तिरपाल से बनाए गए अस्थायी ठिकानों में कर्मचारी रात बिताते हैं।


