वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 29 अक्टूबर को, जानें पूजा मुहूर्त और व्रत के नियम

Untitled

स्वतंत्र बोल
धर्म डेस्क 26 अक्टूबर 2026:
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:58 बजे तक है। चंद्रोदय रात करीब 8:17 बजे होने का अनुमान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणेश जी की पूजा करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। व्रत रखने वाले भक्तों को पूजा के दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

ad

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 10:09 बजे समाप्त होगी। इस दौरान भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

youtube
  • व्रत की तारीख: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
  • चतुर्थी तिथि शुरू: 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर को रात 10:09 बजे
  • गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से 6:58 बजे तक
  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात करीब 8:17 बजे

चंद्रोदय का समय शहर और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए व्रत का पारण करने से पहले स्थानीय पंचांग में चंद्रोदय का समय देख लें।

संकष्टी चतुर्थी पर कैसे करें पूजा?

व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश की पूजा और व्रत का संकल्प ले सकते हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में गणेश जी की पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान गणेश को दूर्वा और लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।

रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

संकष्टी चतुर्थी पर किन बातों का रखें ध्यान?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन खानपान और व्यवहार से जुड़े कुछ नियमों का पालन किया जाता है।

1. गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं
मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते। उनकी पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है।

2. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोलें व्रत
व्रत रखने वाले भक्त चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद ही व्रत का पारण करने की परंपरा है।

3. खानपान में रखें सावधानी
व्रत के दौरान कई लोग मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते। कुछ परंपराओं में अनाज और सामान्य नमक से भी परहेज किया जाता है। व्रत के भोजन के नियम परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।

4. क्रोध और विवाद से बचें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत के दिन शांत रहने, झूठ न बोलने और किसी से विवाद न करने की सलाह दी जाती है।

5. पूजा में पहनावे का ध्यान रखें
कुछ धार्मिक मान्यताओं में पूजा के दौरान काले कपड़े पहनने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसे सभी परंपराओं में अनिवार्य नियम नहीं माना जाता।

6. गणेश जी की मूर्ति के दर्शन श्रद्धा से करें
कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति की पीठ की ओर से दर्शन करने से बचना चाहिए। यह धार्मिक विश्वास का हिस्सा है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। भक्त परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और कार्यों में सफलता की कामना से यह व्रत रखते हैं।

इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से मन को शांति मिलती है।