स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 16 सितम्बर 2026: UPI के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर शुल्क लगाए जाने के वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। अंजन दत्ता नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की है कि 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित Merchant Discount Rate (MDR) फ्रेमवर्क दोनों को रद्द किया जाए। याचिका में कहा गया है कि ये दोनों ही अधिसूचनाएं असंवैधानिक संशोधन पर आधारित हैं।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना को दी गई असंवैधानिक चुनौती
याचिकाकर्ता ने वित्त मंत्रालय द्वारा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A के तहत जारी की गई अधिसूचना को चुनौती दी है। याचिका में केंद्र सरकार के 14 सितंबर के आदेश और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को पूरी तरह निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। याचिका के अनुसार, इस कानून के तहत किया गया बदलाव संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।
15 अक्टूबर से लागू होना था 0.4% मर्चेंट शुल्क
केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर 2026 को नया पेमेंट फ्रेमवर्क पेश किया था। इसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट के लिए 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का निर्णय लिया गया था। अब सरकार के इसी कदम और फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।


