स्वतंत्र बोल
बिलासपुर ,05 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कलेक्टर की शक्तियों पर स्पष्ट सीमा तय कर दी है। अदालत ने कहा है कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यानी CEO का प्रभार बदलने का अधिकार कलेक्टर के पास नहीं है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने कलेक्टर द्वारा जारी आदेश को रद्द करते हुए अधिकारी को फिर से उसी पद पर बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
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यह फैसला न्यायमूर्ति Parth Pratim Sahu की एकलपीठ ने सुनाया। मामला Shubha Damodar Mishra से जुड़ा है, जिन्हें जून 2025 में जनपद पंचायत गौरेला में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया था।
जानकारी के अनुसार, 11 मार्च 2026 को Gaurela-Pendra-Marwahi district के कलेक्टर ने आदेश जारी कर शुभा मिश्रा को CEO के प्रभार से हटा दिया और उन्हें सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय में भेज दिया।
इस आदेश के खिलाफ शुभा मिश्रा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से अदालत में दलील दी गई कि शासन द्वारा नियुक्त जनपद पंचायत CEO को हटाने या उनका प्रभार बदलने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। इसके लिए राज्य शासन की मंजूरी जरूरी होती है।
याचिका में 11 अप्रैल 2025 को जारी उस सरकारी सर्कुलर का भी हवाला दिया गया, जिसमें साफ कहा गया था कि ऐसे मामलों में अंतिम अधिकार केवल राज्य शासन के पास होगा।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी किया था। अदालत ने इसे अवैध मानते हुए तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि Shubha Damodar Mishra को दोबारा जनपद पंचायत गौरेला के CEO पद पर पदस्थ किया जाए।
हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रशासनिक अधिकारों की सीमा तय करने वाला बड़ा निर्णय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों में कलेक्टरों के अधिकारों को लेकर स्पष्टता बनी रहेगी।
