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मुंबई 16 अक्टूबर 2026: राजकुमार राव की फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ मुंबई आतंकी हमलों के मुकदमे और उसे लड़ने वाले वकील के संघर्ष को सामने लाती है। फिल्म में राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है, जिन्होंने 26/11 हमलों के आरोपी अजमल कसाब के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। फिल्म में 1993 के मुंबई बम धमाकों का भी जिक्र है, लेकिन कहानी का मुख्य फोकस 2008 के मुंबई हमलों और कसाब को फांसी तक पहुंचाने की कानूनी लड़ाई पर है।
अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी इस बायोग्राफिकल ड्रामा में वामिका गब्बी, ललित प्रभाकर, जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म की खासियत यह है कि यह अदालत में चलने वाले मुकदमे के साथ उज्ज्वल निकम की निजी जिंदगी और भावनात्मक संघर्ष को भी दिखाती है।
‘शाहिद’ के बाद फिर वकील बने राजकुमार राव
साल 2012 में आई फिल्म ‘शाहिद’ में राजकुमार राव ने वकील शाहिद आजमी का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। शाहिद आजमी की वास्तविक जिंदगी पर आधारित इस फिल्म में वह आतंकवाद के आरोपों में फंसे लोगों को न्याय दिलाने की कोशिश करते दिखे थे।
करीब 14 साल बाद राजकुमार राव एक बार फिर वास्तविक जीवन के वकील की भूमिका में नजर आए हैं। इस बार उनका किरदार उज्ज्वल निकम का है। दोनों फिल्मों की परिस्थितियां अलग हैं। ‘शाहिद’ में वकील उन लोगों के लिए लड़ता है, जिन्हें वह निर्दोष मानता है। वहीं ‘प्रहार’ में निकम आतंकवादी हमलों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते हैं।
क्या है ‘प्रहार’ की कहानी?
फिल्म की शुरुआत उज्ज्वल निकम की बेटी की शादी के दृश्य से होती है। इसके बाद कहानी मुंबई में हुए आतंकी हमलों की तरफ बढ़ती है। ताज होटल और सीएसटी स्टेशन पर हुए हमलों के बाद पकड़े गए एकमात्र जीवित आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत होती है।
कहानी इस कानूनी लड़ाई और कसाब को फांसी तक पहुंचाने की प्रक्रिया के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। फिल्म में 1993 के मुंबई बम धमाकों का भी उल्लेख है, लेकिन 2008 के हमलों के बाद की घटनाओं और अदालत में चले मुकदमे को ज्यादा जगह दी गई है।
इस कहानी का बड़ा हिस्सा दर्शकों के लिए पहले से जाना-पहचाना है। 2008 से 2012 के बीच इस मामले में हुई घटनाएं सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। मुंबई हमलों पर पहले भी फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। इसलिए ‘प्रहार’ के सामने चुनौती सिर्फ घटना को दोबारा दिखाने की नहीं, बल्कि उसे एक अलग नजरिये से पेश करने की है।
उज्ज्वल निकम की निजी जिंदगी पर भी है फिल्म का फोकस
‘प्रहार’ की कहानी केवल अदालत और आतंकवादी हमलों तक सीमित नहीं रहती। फिल्म उज्ज्वल निकम के निजी जीवन में आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाती है। एक तरफ कसाब के खिलाफ मुकदमे की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ परिवार से जुड़ी परेशानियां हैं।
पत्नी की गंभीर बीमारी, बेटे के साथ उलझन और बेटी की शादी जैसे प्रसंग उनके निजी संघर्ष को दिखाते हैं। कानूनी मोर्चे पर उन्हें पाकिस्तान की कूटनीति और अदालत में कसाब की तरफ से अपनाए जाने वाले अलग-अलग पैंतरों का सामना करना पड़ता है। यही फिल्म का एक अहम पहलू है। निकम की लड़ाई सिर्फ अदालत में दलीलें रखने तक सीमित नहीं दिखाई गई है। यह उनके निजी जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और न्याय पाने के संकल्प के बीच चलने वाले संघर्ष की कहानी भी है।
राजकुमार राव की अदाकारी कैसी है?
राजकुमार राव ने ‘शाहिद’ में वास्तविक जीवन के वकील की भूमिका निभाकर अपनी अभिनय क्षमता साबित की थी। ‘प्रहार’ में वह एक बार फिर उसी तरह के गंभीर किरदार में दिखाई देते हैं। उज्ज्वल निकम के रूप में उनका अभिनय फिल्म की प्रमुख ताकत के तौर पर सामने आता है।
फिल्म में निकम के व्यक्तित्व के साथ उनके भावनात्मक पक्ष को भी जगह दी गई है। एक तरफ वह अदालत में कसाब के खिलाफ मजबूती से लड़ते हैं, दूसरी तरफ निजी जिंदगी की मुश्किलों से जूझते हैं। राजकुमार राव का किरदार इन दोनों पहलुओं के बीच आगे बढ़ता है।
फिल्म का एक संवाद निकम के नजरिये को सामने रखता है। वह कसाब से कहते हैं, “मुझे किसी केस को जीतने की खुशी तब तक नहीं मिलती जब तक मुजरिम के भीतर गलती की टीस पैदा न हो।” यह संवाद उनके लिए न्याय की लड़ाई के भावनात्मक अर्थ को सामने लाता है।
आखिर क्यों देखें ‘प्रहार’?
‘प्रहार’ की कहानी में बड़े मोड़ या चौंकाने वाले खुलासे की गुंजाइश सीमित है, क्योंकि मुकदमे और उससे जुड़ी प्रमुख घटनाओं के बारे में दर्शक पहले से जानते हैं। फिल्म की दिलचस्पी इस बात में है कि वह उज्ज्वल निकम की कानूनी लड़ाई के साथ उनके निजी संघर्ष को किस तरह सामने लाती है।
अगर आप मुंबई हमलों से जुड़े मुकदमे, वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्में और गंभीर किरदारों में राजकुमार राव का अभिनय देखना पसंद करते हैं, तो ‘प्रहार’ आपके लिए दिलचस्प हो सकती है। फिल्म का जोर किसी अनजान घटना का रहस्य खोलने के बजाय एक चर्चित कानूनी लड़ाई के पीछे मौजूद इंसान और उसके संघर्ष को दिखाने पर है।


