स्वतंत्र बोल
अहमदाबाद 29 सितम्बर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग वाले मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायाधीश डीएन रे की खंडपीठ ने 31 मार्च 2023 के एकलपीठ के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इसके साथ ही केजरीवाल पर लगाया गया 25 हजार रुपये का जुर्माना भी बरकरार रहा।
क्या है पूरा मामला?
अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2016 के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। यह मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुंचा था।
31 मार्च 2023 को हाई कोर्ट की एकलपीठ ने मामले में CIC के आदेश को रद्द कर दिया था। इसी के साथ केजरीवाल पर 25 हजार रुपये की लागत लगाई गई थी।
केजरीवाल ने एकलपीठ के इस फैसले के खिलाफ खंडपीठ में अपील की थी। इस अपील में 2023 के फैसले और 25 हजार रुपये की लागत को चुनौती दी गई थी।
खंडपीठ ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायाधीश डीएन रे की खंडपीठ ने कहा कि एकलपीठ के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। अदालत ने 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए केजरीवाल की अपील खारिज कर दी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपील खारिज की जा रही है और इसके अलावा कोई और लागत नहीं लगाई गई है।
25 हजार रुपये की लागत क्यों लगी थी?
31 मार्च 2023 को एकलपीठ ने CIC के 2016 के निर्देश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25 हजार रुपये की लागत लगाई थी। उस फैसले में अदालत ने RTI प्रक्रिया से जुड़े मामले में उनके रुख पर टिप्पणी की थी।
बाद में केजरीवाल ने इसी फैसले को खंडपीठ के सामने चुनौती दी। अपील की सुनवाई के दौरान उनकी ओर से लागत लगाए जाने के आधार पर भी सवाल उठाए गए थे।
2016 में कैसे शुरू हुआ था विवाद?
यह विवाद वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। उस समय केंद्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
गुजरात विश्वविद्यालय ने CIC के इस निर्देश को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और 31 मार्च 2023 को एकलपीठ ने CIC का आदेश रद्द कर दिया था।
इसके बाद केजरीवाल ने एकलपीठ के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। सितंबर 2026 में इस अपील पर खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई।
अपील में क्या हुआ?
केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 25 हजार रुपये की लागत लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि केजरीवाल ने प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए मामले को लगातार आगे नहीं बढ़ाया था। CIC ने एक पत्र के आधार पर कार्रवाई शुरू की थी।
वहीं गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया। यूनिवर्सिटी की ओर से मामले को आगे बढ़ाने और RTI प्रक्रिया के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए थे।
अब क्या हुआ?
गुजरात हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 29 सितंबर 2026 को केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। इससे 31 मार्च 2023 का एकलपीठ का फैसला बरकरार रहा। 25 हजार रुपये की लागत भी कायम रही।
इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी के मामले में केजरीवाल की ओर से दायर इस अपील पर गुजरात हाई कोर्ट का फैसला आ गया है।


