स्वतंत्र बोल
रायपुर 23 मार्च 2025:छत्तीसगढ़ सरकार एक नई सरेंडर और पुनर्वास नीति शुरू करने जा रही है। इसके तहत माओवादी हमलों में मारे गए पुलिस मुखबिरों (गोपनीय सैनिकों) के परिवारों के लिए मुआवजे की राशि को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया जाएगा।
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एक अधिकारी ने कहा कि नीति को अभी आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया जाना बाकी है, लेकिन इसे जल्द ही लागू किए जाने की उम्मीद है।
पुलिस मुखबिर या गोपनिया सैनिक वे होते हैं जो बस्तर क्षेत्र में माओवाद विरोधी अभियानों के दौरान पुलिस की सहायता करते हैं। इनमें अक्सर आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी भी शामिल होते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के एक आईएएस अधिकारी ने कहा कि नई नीति वित्तीय सहायता, शिक्षा और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करके माओवादी आंदोलन की अपील को दबाने और उग्रवाद को बढ़ावा देने वाली सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने का प्रयास करती है।
अन्य राज्यों के पीड़ित भी कर सकते हैं दावा
यह नीति वर्ष 2000 में राज्य के गठन के बाद से माओवादी हिंसा के सभी पीड़ितों को लाभ प्रदान करती है। अधिकारी ने कहा कि पीड़ितों के परिवार, स्थायी विकलांगता वाले व्यक्ति और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी इसके पात्र हैं। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के कारण अन्य राज्यों के पीड़ित भी इसके तहत सहायता का दावा कर सकते हैं।
नीति में पीड़ितों के लिए वित्तीय मुआवजा बढ़ाने का वादा किया गया है। इसमें व्यक्तियों और परिवारों पर हिंसा के गंभीर प्रभाव को पहचाना गया है। उन्होंने कहा कि माओवादी हमलों में मारे गए पुलिस गुप्तचरों के परिवारों को 10 लाख रुपए मिलेंगे, जो पिछली राशि से दोगुना है। स्थायी रूप से विकलांग हुए व्यक्ति 3 से 5 लाख रुपए तक की सहायता के पात्र होंगे। माओवादी हमले में क्षतिग्रस्त हुए घरों के लिए भी सहायता राशि में काफी वृद्धि की गई है। साथ ही नष्ट हुई खेती और निर्माण मशीनरी के लिए मुआवजे की राशि को नुकसान के आधार पर बढ़ाकर 60,000 और 8 लाख रुपए कर दिया गया है।
ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में जमीन
नीति के निर्माण से जुड़े एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हत्या या गंभीर चोट के मामलों में परिवारों को ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में जमीन मिलेगी। अगर जमीन उपलब्ध नहीं है तो राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में 4 लाख रुपए और शहरी क्षेत्रों में 8 लाख रुपए का वित्तीय अनुदान देगी। इसके अलावा सरकारी नौकरी पाने में असमर्थ पीड़ित परिवारों को 15 लाख रुपए का एकमुश्त मुआवजा मिलेगा।
आवासीय विद्यालयों में प्रवेश की गारंटी
नीति में कहा गया है कि पीड़ित परिवारों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत छात्रवृत्ति, छात्रावास और निजी स्कूलों में आरक्षित सीटें मिलेंगी। तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को प्रति वर्ष 25000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। जिन बच्चों ने हिंसा में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है, उन्हें प्रयास और एकलव्य मॉडल स्कूल जैसे आवासीय विद्यालयों में प्रवेश की गारंटी दी जाएगी।
सरेंडर करने वाले लोगों को तत्काल 50000
इस नीति में सरेंडर करने के इच्छुक नक्सलियों के लिए कई तरह के प्रोत्साहन भी दिए गए हैं। सरेंडर करने वाले लोगों को तत्काल 50000 का नकद प्रोत्साहन मिलेगा। अधिकारी ने बताया कि हथियारों के साथ सरेंडर करने वालों को आगे भी पुरस्कृत किया जाएगा। उनसे बरामद हथियार के प्रकार के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। उदाहरण के लिए 10 किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) को सौंपने पर 25,000 मिलेंगे, जबकि विस्फोटकों और उपकरणों के बड़े भंडार की बरामदगी में सहायता के लिए 1 लाख रुपए मिल सकते हैं।
इनामी नक्सलियों को अतिरिक्त लाभ
उन्होंने कहा कि 5 लाख या उससे अधिक के इनाम वाले नक्सलियों को आवास या कृषि के लिए भूमि सहित अतिरिक्त लाभ मिलेगा। वैकल्पिक रूप से वे अचल संपत्ति खरीदने के लिए 2 लाख रुपए के अनुदान का दावा कर सकते हैं। पुनर्वास प्रक्रिया में छह महीने की व्यवहारिक निगरानी अवधि शामिल है, जिसके बाद सरकार समीक्षा करेगी और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस ले सकती है।
नई नीति में माओवादियों के सरेंडर में सहायता करने वालों को पुरस्कार प्रदान किया गया है। सरेंडर में सहायता करने वाले पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी माओवादियों के इनाम के 10 प्रतिशत के बराबर इनाम के पात्र होंगे, जिसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रुपए होगी। महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करने वाले नागरिक या परिवार के सदस्यों को 50000 मिलेंगे।
रोजगार देने वाली निजी कंपनियों को सब्सिडी
नई समर्पण नीति में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के उपाय भी शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि सक्षम योजना के तहत महिलाओं को 2 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार 3 प्रतिशत ब्याज वहन करेगी। सरेंडर करने वाले नक्सलियों या पीड़ितों के परिवारों को रोजगार देने वाली निजी कंपनियों को पांच साल के लिए मजदूरी सब्सिडी मिलेगी, जिसकी सीमा सालाना 5 लाख रुपये होगी।
राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि सभी प्रभावित परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा योजनाओं के तहत प्राथमिकता वाले राशन कार्ड और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों को मुफ्त या सौर ऊर्जा से चलने वाले बिजली कनेक्शन का लाभ मिलेगा।
