स्वतंत्र बोल
रायपुर 19 फरवरी 2026. राजधानी के संतोषी नगर इलाके में संचालित एमआर हॉस्पिटल एक बार खुल गया है। हॉस्पिटल को डेढ़ महीने पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना अनुमति संचालित करने पर बंद कराते 20000 का जुर्माना लगाया गया था। हॉस्पिटल दोबारा खुलते ही फिर विवादों में पद गया है, हॉस्पिटल संचालक द्वारा दूरस्थ गाँवो के मरीजों को आयुष्मान भारत योजना से फ्री ईलाज का झांसा देकर मरीजों को भर्ती कर ठगा जा रहा है।
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एम्बुलेंस ड्राइवर कमीशन में ला रहे मरीज-
एमआर हॉस्पिटल में भर्ती रहे मरीज रायगढ़ के लैलूंगा निवासी सोहन सिंह को 12 फरवरी की आधी रात निजी एम्बुलेंस ड्राइवर ने अच्छा हॉस्पिटल बताकर भर्ती किया था, जबकि रायगढ़ से उन्हें राजधानी के सरकारी हॉस्पिटल में रिफर किया गया था। मरीज के परिजनों को हॉस्पिटल संचालक एसके मंडल और डॉ प्रीतम प्रजापति ने आयुष्मान भारत से (स्मार्ट कार्ड) से मुफ्त ईलाज का आश्वासन दिया था। मरीज के भर्ती होते ही जाँच के नाम 3000 रुपये लिए गए।

ईलाज नहीं, डिस्चार्ज करने मांगे 70 हजार-
हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा भारी होने के अगले दिन ही 40 हजार रुपये जमा करने का दबाव बनाया गया, परिजनों ने पैसे देने में असमर्थता जताया तो दवाइया और ईलाज बंद कर दिया गया। परिणाओ ने सरकारी अस्पताल डिस्चार्ज करने की मांग तो हॉस्पिटल का 70 हजार का बिल चुकाने दबाव बनाया गया। प्रबंधन द्वारा पैसे नहीं मिलने मरीज का ईलाज और दवाइयां दोनों बंद कर दिया, मीडिया स्वास्थ्य विभाग के दबाव के बाद मंगलवार को मरीज डिस्चार्ज कर सरकारी अस्पताल शिफ्ट किया गया।
इस हॉस्पिटल का संचालन एसके मण्डल और डॉ प्रीतम प्रजापति ऑर्थोपीडिक के द्वारा किया जा रहा है। तंग गलियों में संचालित हॉस्पिटल को अनुमति देने पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारो पर सवाल उठ रहा है।
