स्वतंत्र बोल
महासमुंद ,09 मई 2026: छत्तीसगढ़ में सामने आए डेढ़ करोड़ रुपए के एलपीजी घोटाले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। जिस गैस की सप्लाई आम लोगों के घरों तक पहुंचनी थी, वही गैस रात के अंधेरे में चोरी-छिपे बाजार में खपाई जा रही थी। मामले की परतें खुलीं तो जांच एजेंसियां भी हैरान रह गईं।
इस हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्लांट मैनेजर, खाद्य अधिकारी, सहायक खाद्य अधिकारी के साथ गौरव गैस एजेंसी के संचालक और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर को हिरासत में ले लिया है। पंकज चंद्राकर पूर्व राज्यमंत्री पूरन चंद्राकर के दामाद बताए जा रहे हैं, जिसके बाद मामला और ज्यादा चर्चाओं में आ गया है।
पुलिस जांच के मुताबिक, मार्च 2026 के आखिरी सप्ताह से लेकर 6 अप्रैल तक पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया गया। आरोप है कि खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव, प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव और गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर ने मिलकर एलपीजी कैप्सूल वाहनों को अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल तक पहुंचाया, जहां से गैस धीरे-धीरे निकालकर अलग-अलग टैंकरों के जरिए बाजार में बेची जाती रही।
लेकिन इस पूरे खेल में सबसे बड़ा ‘गवाह’ बना GPS सिस्टम। कैप्सूल वाहनों में लगे GPS ट्रैकिंग डेटा ने वो राज खोल दिए, जिन्हें आरोपियों ने बेहद चालाकी से छिपाने की कोशिश की थी। जांच में पता चला कि 31 मार्च को 2 कैप्सूल, 1 अप्रैल को 1, 3 अप्रैल को 1 और 5 अप्रैल को 2 कैप्सूल से गैस निकाली गई। कुल मिलाकर 6 कैप्सूल से करीब 90 मीट्रिक टन गैस अवैध रूप से खाली की गई।
जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो तस्वीर और डरावनी निकली। दस्तावेजों में अप्रैल महीने में सिर्फ 47 टन गैस खरीदी जाना दर्ज था, जबकि बिक्री 107 टन से ज्यादा दिखाई गई। यानी बिना खरीदी गई गैस भी बाजार में बेच दी गई। यही वह आंकड़ा था जिसने पूरे घोटाले की पोल खोल दी।
पूछताछ में प्लांट कर्मचारियों ने भी कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि गैस पहले प्लांट के बुलेट टैंक में खाली की जाती थी, फिर निजी टैंकरों से अलग-अलग इलाकों में सप्लाई कर दी जाती थी। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में 4 से 6 टन तक गैस कच्चे चालान के जरिए बेची गई।
फिलहाल पुलिस ने प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव, खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर को हिरासत में लिया है। वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर अब भी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
इस पूरे मामले ने सिर्फ प्रशासनिक सिस्टम पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी बड़ा भूचाल ला दिया है। क्योंकि अब सवाल सिर्फ गैस चोरी का नहीं, बल्कि उस नेटवर्क का है जो महीनों तक पर्दे के पीछे रहकर करोड़ों का खेल खेलता रहा।


