स्वतंत्र बोल
रायपुर 03 अप्रैल 2026. भिलाई के यस बैंक में हुए 165 करोड़ रुपये के हवाला कांड में हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज किया है। सीबीआई अब विस्तृत जाँच करेगी, जिससे हवालाकांड में शामिल सफेदपोश लोगो के चेहरे भी सामने आएंगे। यह घटनाक्रम साल अनिमेष सिंह के FIR करने के बाद सामने आया था, स्वतंत्र बोल की पड़ताल में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आया है। इस केस के तीन प्रमुख किरदार है अनिमेष सिंह , हितेश चौबे और प्रभुनाथ मिश्रा.. राजधानी के रायपुरा, अग्रोहा कॉलोनी निवासी हितेश चौबे ठेकेदार और सप्लायर है, जिसकी फर्म में अनिमेष सिंह निवासी दीनदयाल पुरम थाना खुर्सीपार भिलाई काम करता था, और प्रभुनाथ मिश्रा भिलाई के रहवासी है जो स्वाभिमान पार्टी से जुड़े श्रमिक नेता है, इन्होने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया था।
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दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ कराया FIR-
अनिमेष सिंह भिलाई के कांग्रेस नेत्री मनोरमा सिंह का भतीजा है, उसने खुर्सीपार थाने में जनवरी 2020 में हितेश चौबे और बाला चौहान के खिलाफ अपराध दर्ज कराया, जिसका क्रमांक 20/2020 है, कि
“मै हितेश चौबे की फर्म में 12000 रुपये की नौकरी करता था, हितेश ने मेरे दस्तावेजों का उपयोग करजे यस बैंक की सुपेला ब्रांच में खाता खुलवाया जिसका क्रमांक 0067630000***** और उसका सञ्चालन वही करता था। हितेश ने बैंक का पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड सब रख लिया था.. 165 करोड़ के ट्रांजेक्शन से मेरा कोई लेना देना नहीं है।”
जैसे ही हितेश चौबे को FIR होने की जानकारी हुई उसने अनिमेष के उसी खुर्सीपार थाने में FIr कराया जहा अनिमेष ने कराया था। हितेश ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में लिखा कि
“वह अग्रोहा कॉलोनी रायपुर का निवासी हूँ, मैंने होप इंटरप्राइज़ेश के खाते 4576******* बैंक ऑफ़ बरोदा सुन्दर नगर से 35 लाख रूपये और होप इंटरप्रजेश के खाता से 29 लाख रुपये एवं 10 लाख रुपये उसके यस बैंक खाता में दिया था, जिसे शाम तक अनिमेष लौटने वाला था। परन्तु 19 अक्टूबर 2029 को शाजिश करके मुझे झूठा यूटीआर yesbank****भेज दिया जो मेरा था ही नहीं,, ऐसा करके उसने मेरे साथ धोखधड़ी किया है।”पुलिस ने हितेश की शिकायत पर धरा 420 अंतर्गत अपराध क्रमांक 24/2020 दर्ज किया।”
दोनों के FIR में चौकाने वाला पहलू है, हितेश ने अनिमेष के FIr कराने के बाद अपराध दर्ज कराया। अगर उसके धोखाधड़ी हुआ तो वह साला भर इंतजार क्यों करता रहा? हितेश ने अपने FIR में लिखाया कि वह अग्रोहा कॉलोनी का रहवासी है, तो FIr डीडी नगर थाने में दर्ज होना था, पर प्रभाव का उपयोग करके खुर्सीपार में FIR कराया।
पुलिस ने सही जाँच नहीं की-
अपराध दर्ज होने के बाद पुलिस ने सही जांच नहीं की, और हितेश व बाला चौहान का पक्ष लेती रही। अनिमेष की शिकायत पर कार्यवाही करने की जगह उसे खात्मा करने भेज दिया, और हितेश की शिकायत पर अनिमेष की गिरफ्तारी हो गई। इस दौरान सही जाँच की मांग को लेकर श्रमिक नेता प्रभुनाथ मिश्रा ने लगातार एसपी दुर्ग आईजी दुर्ग और डीजीपी को पत्र लिखा पर तत्कालीन पुलिस अधिकारियो ने सत्ता के सरंक्षण में एक पक्षीय कार्यवाही की।
एसटीडी से शुरू हुआ सफर-
हितेश कुमार चौबे मूलतः तीन भाई है रितेश, रुपेश और हितेश। हितेश के बारे में बताते है कि वह कुछ वर्षो पहले तक दुर्ग में एसटीडी चलता था, बाद में राजधानी के पंडित के संपर्क में आने के बाद भाग्योदय हुआ और कहानी बदल गई। वही से हितेश ने होप इंटरप्राइजेस फर्म बनाकर पेपर सप्लाई और पुस्तके छपाई का काम करता रहा। इससे उसे करोडो का लाभ हुआ, साल 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने पर भिलाई के तत्कालीन महापौर देवेंद्र यादव से नजदीकी बढ़ी और सितारा चमकने लगा। हितेश की फर्म को भिलाई दुर्ग सहित लोक निर्माण विभाग में करोडो का ठेका मिला और अनिमेष के नाम पर खोले खाते में अरबो का लेनदेन हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार उस बैंक खाते में विदेशो से भी पैसा डिपाजिट हुआ है।
जाँच में बैंक ने सहयोग नहीं किया-
एफआईआर होने पर पुलिस ने यस बैंक प्रबंधन को पत्र लिखकर खाते की पूरी जानकारी मांगी, तो यस बैंक प्रबंधन निजता का हवाला देकर जानकारी देने से बचता रहा और दुर्ग पुलिस मुँह ताकती रही। यही बात दुर्ग पुलिस ने हाईकोर्ट में लिखकर भी दिया है। यस बैंक में अनिमेष के नाम से खोले गए एक खाते से 457 अन्य बैंक खातों में ट्रांजेक्शन हुआ, करोडो रुपये खाते में जमा होते और अन्य खातों में ट्रांसफर हो जाता। पुलिस उन 457 में से 285 खातों की जांच तक नहीं कर पाई।
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