स्वतंत्र बोल
रायपुर 22 सितम्बर 2026 : अगर आप अपने पहचान पत्र से सिम कार्ड निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को बेच रहे हैं या किराए पर दे रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल यूजर्स के लिए एक बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी पहचान पत्र से सिम खरीदने-बेचने या मोबाइल के आईएमईआई (IMEI) नंबर से छेड़छाड़ करने पर 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
दूरसंचार विभाग के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सिम लेना, दूसरे व्यक्ति की पहचान पर कनेक्शन हासिल करना या अपने नाम का सिम धोखाधड़ी के लिए किसी को देना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह एडवाइजरी छत्तीसगढ़ में हाल ही में उजागर हुए एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क के बाद जारी की गई है।
रायपुर में खुला था फर्जी सिम का बड़ा नेटवर्क
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में 410 से अधिक लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करने का मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि इन फर्जी सिम का उपयोग साइबर ठगों द्वारा ठगी के लिए किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने मध्य प्रदेश के मैहर निवासी रामकृष्ण कुशवाहा को गिरफ्तार किया था।
आरोपी रामकृष्ण कुशवाहा चार साल पहले रायपुर आया और गुढ़ियारी में रहने लगा। उसने एक युवती से शादी की और उसके नाम से तीन कंपनियों के सिम बेचने का काम शुरू किया। वह सिम खरीदने आने वाले ग्राहकों से बायोमैट्रिक मशीन पर चालाकी से दो बार अंगूठा लगवा लेता था। इससे एक सिम ग्राहक को मिलता और दूसरा आरोपी अपने पास रख लेता था। आरोप है कि उसने ऐसे 410 से अधिक सिम गोवा में साइबर अपराधियों को बेच दिए थे।
एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 सिम की सीमा
नियमों के अनुसार, भारत में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन ही रख सकता है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा 6 सिम की है। यदि कोई व्यक्ति इस तय सीमा से अधिक सिम रखता है, तो उस पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।
सरकार ने फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए 23 अगस्त से ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ में एक नया फीचर जोड़ा है। इसके जरिए तय सीमा से अधिक सिम रखने वालों की पहचान के लिए फोटो और अन्य विवरणों का मिलान किया जाएगा। इस नई व्यवस्था को अपने सिस्टम में लागू करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है।


