स्वतंत्र बोल
रायपुर 18 अप्रैल 2026: संसद में एक अहम विधेयक के गिरते ही सियासी गलियारों में घमासान तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM Vijay Sharma ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर ऐसा हमला बोला है, जिसने बहस को और ज्यादा गरमा दिया है।
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लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पास न होने के बाद विजय शर्मा ने इसे सीधे तौर पर देश की महिलाओं से जोड़ते हुए कहा कि इस कानून का विरोध करना “महिलाओं का अपमान” है। उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे “सरासर बेईमानी” करार दिया।
शर्मा ने सवाल उठाया कि जब देश की आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात हो रही है, तो इसका विरोध कैसे किया जा सकता है। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है।
उन्होंने परिसीमन को भी देश की जरूरत बताते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के हिसाब से लोकसभा सीटों का बढ़ना जरूरी है। उनके मुताबिक, वर्तमान जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अहम है और इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, 2029 के आम चुनावों से महिलाओं को आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। मतदान के दौरान 298 सांसदों ने बिल का समर्थन किया, जबकि 230 ने इसके खिलाफ वोट दिया।
लोकसभा स्पीकर Om Birla ने परिणाम घोषित करते हुए साफ किया कि आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो पाया। इस नतीजे के बाद सियासत और भी तेज हो गई है।
विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि मौजूदा सीटों के आधार पर ही इसे तुरंत लागू किया जाए। वहीं सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए विपक्ष की नीयत पर सवाल उठा रहा है।
अब यह विवाद सिर्फ एक विधेयक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर महिलाओं के अधिकार, राजनीतिक रणनीति और आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाला मुद्दा बन चुका है।
