स्वतंत्र बोल
रायपुर 26 अक्टूबर 2026: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित असर को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 27 से 29 अक्टूबर तक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। दक्षिण बस्तर के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के कलेक्टर और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने और जनहानि रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
राहत शिविरों से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक तैयारी
प्रशासन को राहत शिविर 24 घंटे चालू रखने और वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सा सेवाएं निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को निर्धारित स्थानों पर तैयार रहने को कहा गया है।
किसानों, फसलों और पशुधन की सुरक्षा पर जोर
बैठक में किसानों के लिए फसलों से जुड़ी विस्तृत एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि चक्रवात के संभावित असर से फसलों और पशुधन को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने कच्चे मकानों को तेज हवाओं से होने वाले संभावित नुकसान का आकलन करने पर जोर दिया। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
बिजली, दूरसंचार और सड़क व्यवस्था पर भी नजर
तेज हवाओं से बिजली के खंभे गिरने की स्थिति में नुकसान से निपटने के लिए विद्युत विभाग को तैयार रहने को कहा गया है। दूरसंचार सेवाएं बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़कों पर पेड़ गिरने की स्थिति में उन्हें तत्काल हटाने की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि आवागमन बाधित न हो। इसके अलावा होर्डिंग्स और अन्य असुरक्षित संरचनाओं की स्थिति का आकलन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राज्य शासन ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।


