ऋषि पंचमी 2026: आज पूजा के लिए मिलेंगे सिर्फ 2 घंटे 28 मिनट! जानें शुभ मुहूर्त और व्रत का पूरा सच

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नई दिल्ली।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला ऋषि पंचमी का व्रत आज, 15 सितंबर 2026 (मंगलवार) को रखा जा रहा है। सप्तऋषियों के पूजन और आत्मशुद्धि को समर्पित यह पर्व पंचमी तिथि सुबह 7:44 बजे शुरू होने के साथ प्रारंभ हो चुका है। ऋषि पंचमी की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 28 मिनट की है। इस दौरान श्रद्धालु सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन की अनजानी भूलों के लिए प्रायश्चित और क्षमा याचना करते हैं।

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सप्तऋषियों के पूजन और आत्मशुद्धि का पर्व

ऋषि पंचमी मुख्य रूप से सनातन परंपरा के महान सप्तऋषियों—कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन इन सात ऋषियों का स्मरण और नमन करने से व्यक्ति को अपने जीवन में हुई गलतियों का प्रायश्चित करने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि इस पर्व को सिर्फ सामान्य पूजा-पाठ न मानकर आत्मशुद्धि, संयम और आत्म-निरीक्षण से जोड़कर देखा जाता है।

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महिलाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ऋषि पंचमी व्रत?

ऋषि पंचमी का व्रत पारंपरिक रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत विशेष माना गया है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में मासिक धर्म (रजस्वला) से जुड़े कुछ नियमों का उल्लेख मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान अनजाने में हुए किसी धार्मिक नियम के उल्लंघन या दोष से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं प्रायश्चित स्वरूप इस व्रत का पालन करती हैं। यही वजह है कि इसे महिलाओं की शुद्धि और मानसिक शांति से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना गया है।

जानें ऋषि पंचमी की पूजा विधि और परंपराएं

ऋषि पंचमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में सप्तऋषियों का ध्यान लगाकर उनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं इस दिन विशेष नियमों का पालन करते हुए दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। पूजा के अंत में सप्तऋषियों को श्रद्धापूर्वक नमन कर परिवार की सुख, समृद्धि और शांति की प्रार्थना की जाती है।

पंचमी तिथि का समय और समापन

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे से शुरू होकर 16 सितंबर 2026 को सुबह 8:59 बजे समाप्त होगी। उदय तिथि और शुभ मुहूर्त के अनुसार 15 सितंबर को ही दिनभर पूजा-पाठ और व्रत के विधान पूरे किए जा रहे हैं।