स्वतंत्र बोल
रायपुर 27 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उस पति की याचिका खारिज कर दी, जिसने मंदिर में हुई शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। पति का दावा था कि विवाह के दौरान सात फेरे नहीं हुए और शादी के दस्तावेजों पर उससे दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। वहीं, पत्नी ने विवाह को हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न बताते हुए पति पर भरण-पोषण से बचने के लिए शादी की वैधता को चुनौती देने का आरोप लगाया था।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के एक दंपती से जुड़ा है। दोनों की मुलाकात फेसबुक पर हुई थी और उन्होंने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी की थी। बाद में पति ने विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत याचिका दायर की।
पति ने शादी को अमान्य बताने के लिए क्या दलील दी?
पति ने दावा किया कि शादी के दौरान सात फेरे नहीं हुए थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि विवाह से जुड़े दस्तावेजों पर उससे जबरन हस्ताक्षर कराए गए। इसी आधार पर उसने विवाह को अमान्य घोषित करने की मांग की।
दूसरी ओर, पत्नी का कहना था कि दोनों की शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए विवाह की वैधता को चुनौती दे रहा है।
हिंदू विवाह अधिनियम की किन धाराओं पर हुई सुनवाई?
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5, 7 और 11 पर विचार किया। धारा 5 हिंदू विवाह की कानूनी शर्तों से संबंधित है। धारा 7 विवाह की रस्मों और रीति-रिवाजों से जुड़ी है, जबकि धारा 11 कुछ निर्धारित कानूनी शर्तों का उल्लंघन होने पर विवाह को शून्य घोषित करने से संबंधित है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 7 के तहत हिंदू विवाह संबंधित पक्षों के प्रचलित रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार संपन्न होता है। यदि संबंधित परंपरा में अग्नि के सामने सात फेरे या सात कदम लेने की रस्म शामिल है, तो उस रस्म के पूरा होने का महत्व है।
फैमिली कोर्ट के फैसले में क्या गलती मानी गई?
हाई कोर्ट के अनुसार, फैमिली कोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बजाय विवाह की रस्मों और उसकी वैधता पर फैसला सुनाया था। जबकि धारा 11 के तहत यह देखना जरूरी था कि विवाह में धारा 5 की निर्धारित शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
इसी कानूनी त्रुटि के आधार पर हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया। हालांकि, इससे पति को विवाह अमान्य घोषित कराने की मांग में राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई।


