CGPSC घोटाला: टामन सोनवानी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं, अब आगे क्या?

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स्वतंत्र बोल
रायपुर 17 अक्टूबर 2026:
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2020-21 भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। सोनवानी ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के आधार पर भी जमानत मांगी थी, लेकिन अदालत ने इस दलील को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना।

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जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं सोनवानी

ED ने CGPSC भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। एजेंसी की रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सोनवानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।

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मेडिकल आधार पर जमानत की मांग भी खारिज

सोनवानी की ओर से अदालत में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला दिया गया। उनके वकील ने दलील दी कि हृदय संबंधी समस्या के कारण 20 अगस्त 2026 को अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था। साथ ही, स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दिए जाने की बात भी कही गई। उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत देने की मांग की गई। वहीं, ED ने अदालत को बताया कि जरूरत पड़ने पर सोनवानी को रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या AIIMS में इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। अदालत ने जानलेवा स्थिति या हिरासत के दौरान जरूरी इलाज नहीं मिलने के प्रमाण के अभाव में PMLA के तहत विशेष राहत देने का आधार स्वीकार नहीं किया। सह-आरोपियों को जमानत मिलने की दलील भी सोनवानी के पक्ष में पर्याप्त नहीं मानी गई।

ED का आरोप: 3.45 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि

ED के मुताबिक, CGPSC की 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के बदले आर्थिक लेन-देन किया गया। एजेंसी ने करीब 3.45 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है। ED का आरोप है कि 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपए जुटाए गए और रकम अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाई गई। एजेंसी की अभियोजन शिकायत में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में 60 से 65 लाख रुपए में पद का सौदा और चयन की गारंटी देने का दावा भी किया गया है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।

भर्ती नियमों में बदलाव को लेकर भी आरोप

ED ने आरोप लगाया है कि 14 जुलाई 2021 को भर्ती नियमों में संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजा’ शब्द हटा दिया गया था। एजेंसी के मुताबिक, इस बदलाव से सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी के क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और DSP पद पर चयन का रास्ता बना। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति को CSR के नाम पर 45 लाख रुपए दिए गए। ED का दावा है कि यह रकम कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने के बदले दी गई थी। इन आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।

CGPSC परीक्षा में शामिल हुए थे 1.29 लाख अभ्यर्थी

CGPSC की वर्ष 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 2,548 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा और 509 अभ्यर्थी साक्षात्कार तक पहुंचे थे। अंतिम चयन सूची में 170 अभ्यर्थियों के नाम शामिल हुए। इस मामले में CBI ने जनवरी 2026 में दाखिल आरोपपत्र में 29 लोगों को आरोपी बनाया था। दूसरी ओर, ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी डिजिटल चैट, दस्तावेजों और बयानों की भी पड़ताल कर रही है।

अब सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं सोनवानी

हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद टामन सिंह सोनवानी सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर सकते हैं। परिस्थितियों में बदलाव होने पर कानून के अनुसार दोबारा जमानत की मांग करने का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है। फिलहाल, CGPSC भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की अभियोजन शिकायत विशेष PMLA अदालत में लंबित है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।