स्वतंत्र बोल
चंडीगढ़ / बरनाला 23 अक्टूबर 2026: पंजाब का हर जिला अपनी एक अलग पहचान रखता है। मालवा क्षेत्र का बरनाला जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, राजनीतिक चेतना और कृषि प्रधान संस्कृति के लिए जाना जाता है। पंजाब के सबसे युवा जिलों में शामिल बरनाला राज्य के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस जिले की तीनों विधानसभा सीटें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम बनी हुई हैं।
पटियाला रियासत से जुड़ा है बरनाला का इतिहास
बरनाला का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। एक समय यह पटियाला रियासत की राजधानी हुआ करता था। पटियाला को एक प्रमुख रियासत के रूप में स्थापित किए जाने के बाद बरनाला को उसका जिला मुख्यालय घोषित किया गया था, जिसमें बठिंडा और मानसा जैसे क्षेत्र भी इसकी तहसीलों में शामिल थे। लंबे समय तक संगरूर जिले का हिस्सा रहे बरनाला को प्रशासनिक सुविधा और स्थानीय विकास की जरूरतों को देखते हुए 19 नवंबर 2006 को पंजाब का स्वतंत्र जिला घोषित किया गया। सिख इतिहास और परंपराओं में इस क्षेत्र के लोगों की क्रांतिकारी सोच और जुझारू स्वभाव की अपनी एक खास पहचान है।
बरनाला की 3 विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरण
पंजाब विधानसभा में बरनाला जिले के अंतर्गत कुल 3 सीटें आती हैं, जिन पर राजनीतिक गतिविधियां हमेशा तेज रहती हैं।
-
बरनाला (सीट संख्या 103): यह जिले की सबसे प्रमुख सीट है। 2022 के चुनाव में यहाँ ‘आप’ के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने जीत दर्ज की थी, और बाद के उपचुनाव के बाद वर्तमान में कांग्रेस के कुलदीप सिंह ढिल्लों यहाँ से विधायक हैं।
-
भदौर (सीट संख्या 102): यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित चर्चित सीट है, जहाँ 2022 में ‘आप’ के लाभ सिंह उगोके विजयी रहे थे।
-
महला कलां (सीट संख्या 104): यह भी एससी आरक्षित सीट है, जहाँ 2022 के चुनाव में ‘आप’ के कुलवंत सिंह पंडोरी ने जीत हासिल की थी।
2027 के चुनाव को देखते हुए यहाँ आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी की पूरी नजर है। यहाँ के मतदाता मुख्य रूप से विकास, बेरोजगारी और कृषि से जुड़े मुद्दों पर मतदान करते हैं।
कृषि, उद्योग और जनजीवन की झलक
क्षेत्रफल के लिहाज से बरनाला पंजाब के छोटे जिलों में है। प्रशासनिक रूप से इसमें 2 उपमंडल (बरनाला और तपा), 3 तहसीलें और 3 विकास खंड (बरनाला, सेहना और महला कलां) आते हैं। इसकी सीमाएं संगरूर, बठिंडा और लुधियाना से मिलती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की कुल आबादी 5,96,294 थी, साक्षरता दर 68.9% और लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 876 था।
यहाँ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती (गेहूं और धान) पर टिकी है। इसके अलावा धनौला स्थित ‘ट्राइडेंट ग्रुप’ एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है जो रोजगार में बड़ा योगदान देता है। पारंपरिक पंजाबी खान-पान, बैसाखी-लोहड़ी जैसे त्योहार और यहाँ के लोक नृत्य इस क्षेत्र की संस्कृति को जीवंत बनाते हैं।


