स्वतंत्र बोल
रायपुर 06 फरवरी 2025: डोंगरगढ़ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महामुनिराज सिर्फ संत या जैन आचार्य नहीं थे, वह एक युग पुरुष थे, जिन्होंने एक नए विचार और नए युग का प्रवर्तन किया। आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज भारत, भारतीय संस्कृति, भाषाओं और राष्ट्र की पहचान के प्रतीक बने। उन्होंने न केवल धर्म का संरक्षण किया बल्कि भारत की पहचान को वैश्विक स्तर पर व्याख्यायित करने का महान कार्य किया।
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धर्म, राष्ट्र और समाज के लिए जीवन का हर क्षण समर्पित करने की बात करने वाले बहुत लोग होते हैं, लेकिन ऐसा जीवन जीने वाले केवल कुछ ही होते हैं और आचार्य विद्यासागर जी उन्हीं में से एक थे हमारे देश की संत परंपरा बहुत समृद्ध है और देश को जब जिस भूमिका की जरूरत पड़ी संतों ने उस भूमिका का निर्वहन किया। संतों ने ज्ञान का सृजन भी किया और देश को एकता के सूत्र में भी बांधकर रखा। गुलामी के कालखंड में संतों ने भक्ति के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना की लौ जलाए रखी।
आचार्य विद्यासागर जी का संदेश, प्रवचन व लेखन जैन समुदाय के साथ-साथ पूरे राष्ट्र के लिए एक अनमोल धरोहर है। कल्पवृक्ष की तरह जीवन जीने वाले आचार्य जी के जीवन के हर क्षण से राष्ट्र को शक्ति मिली, धर्म को संबल मिला और त्याग व संयम का प्रचार हुआ।
