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धर्म डेस्क 5 नवंबर 2026: हिंदू धर्म में हर देवी-देवता का अपना वाहन बताया गया है। भगवान शिव नंदी पर सवार होते हैं, भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ है और माता दुर्गा शेर की सवारी करती हैं। इसी तरह धन की देवी माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू है। धार्मिक चित्रों में उन्हें कमल के फूल पर विराजमान और उल्लू पर सवार दिखाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी ने उल्लू को ही अपना वाहन क्यों चुना? इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है।
माता लक्ष्मी को ‘उलूक वाहिनी’ भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उल्लू को उनकी सवारी बनने का अवसर कार्तिक मास की अमावस्या यानी दिवाली की रात मिला था। इस कथा में उल्लू की अंधेरे में देखने की क्षमता को खास वजह बताया गया है।
कैसे बना उल्लू माता लक्ष्मी का वाहन?
पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि की रचना के बाद जब सभी देवी-देवता पृथ्वी पर आए, तो पशु-पक्षियों के बीच उनका वाहन बनने की होड़ लग गई। हर कोई किसी न किसी देवी-देवता की सवारी बनना चाहता था। इस बात को लेकर उनमें विवाद होने लगा। तब माता लक्ष्मी ने सभी को शांत कराया। उन्होंने कहा कि वे हर साल कार्तिक मास की अमावस्या यानी दिवाली की रात पृथ्वी पर विचरण करने आती हैं। उसी रात वे अपने वाहन का चुनाव करेंगी। कथा के मुताबिक, कार्तिक अमावस्या की रात चारों तरफ अंधेरा था। जब माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आईं, तो उल्लू ने अपनी तेज नजरों से उन्हें देख लिया। वह तुरंत उनके पास पहुंचा और माता लक्ष्मी से उसे अपना वाहन बनाने की प्रार्थना की उस समय वहां कोई दूसरा पशु-पक्षी मौजूद नहीं था। ऐसे में माता लक्ष्मी ने उल्लू को अपना वाहन स्वीकार कर लिया। तभी से उन्हें ‘उलूक वाहिनी’ कहा जाने लगा।
उल्लू से जुड़ी हैं ये धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं में उल्लू को बुद्धि, विवेक और समझदारी का प्रतीक माना जाता है। माता लक्ष्मी के वाहन के रूप में इसे धन के सही इस्तेमाल से भी जोड़कर देखा जाता है। उल्लू रात के अंधेरे में भी देख सकता है। इसे इस बात का प्रतीक माना जाता है कि व्यक्ति को मुश्किल परिस्थितियों और अज्ञानता के बीच भी सही रास्ता पहचानना चाहिए। मान्यता है कि धन के साथ व्यक्ति के पास बुद्धि और विवेक भी होना जरूरी है। इनके बिना धन का सही इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है। उल्लू से जुड़ी मान्यता यह संदेश देती है कि धन का दिखावा करने के बजाय उसकी रक्षा करनी चाहिए और उसका इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए।


