मेटा, गूगल और एक्स को लग सकता है बड़ा झटका: यूजर-जनरेटेड कंटेंट को लेकर सरकार बदलने जा रही है नियम

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 5 नवंबर 2026:
सोशल मीडिया पर कोई गलत पोस्ट करता है, तो क्या उसके लिए वह प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार होगा? अब तक इसका जवाब ज्यादातर मामलों में ‘नहीं’ रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह व्यवस्था बदल सकती है। केंद्र सरकार फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (X) जैसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को खत्म करने पर विचार कर रही है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो यूजर्स की ओर से शेयर किए जाने वाले पोस्ट, वीडियो और कमेंट्स के लिए इन सोशल मीडिया कंपनियों की सीधी जवाबदेही भी तय हो सकती है।

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क्या है ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा और सरकार की योजना?

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने सोशल मीडिया नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। वर्तमान में इन टेक कंपनियों को आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) सुरक्षा मिलती है। इस कानूनी सुरक्षा के कारण यूजर्स द्वारा शेयर किए गए कंटेंट के लिए कंपनियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता है। अब सरकार इस सुरक्षा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाकर मुख्य रूप से इंटरनेट, टेलीकॉम और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स तक ही सीमित करने पर विचार कर रही है। इसका मतलब यह है कि मेटा, गूगल और एक्स जैसी कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर होने वाले कंटेंट के प्रति ज्यादा जवाबदेह बनाया जा सकता है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार यह अभी केवल शुरुआती स्तर पर चल रही चर्चा है और सरकार ने इसे लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

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एल्गोरिदम और कंटेंट की पहुंच पर उठ रहे सवाल

‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा ने अतीत में मेटा, गूगल और एक्स जैसी कंपनियों को बड़े पैमाने पर अपना कारोबार बढ़ाने और यूजर-जनरेटेड कंटेंट (आम लोगों द्वारा खुद तैयार फोटो, वीडियो और पोस्ट) के जरिए प्लेटफॉर्म खड़े करने में मदद की है। इस सुरक्षा के चलते कंपनियों को हर पोस्ट की कानूनी जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती थी। हालांकि, सरकार से जुड़े हलकों का मानना है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल संदेश या जानकारी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का जरिया नहीं रह गए हैं। ये कंपनियां अपने एल्गोरिदम (Algorithm) के जरिए यह तय करती हैं कि कौन-सी पोस्ट या वीडियो किस यूजर को दिखाई जाएगी। वे कुछ चुनिंदा कंटेंट को बहुत बड़े पैमाने पर प्रमोट करती हैं, जबकि अन्य की पहुंच सीमित कर देती हैं। इसके अलावा वे अपनी कम्युनिटी गाइडलाइन्स के तहत पोस्ट हटाती भी हैं, जो कई बार भारतीय कानूनों से मेल नहीं खाते। इसी तर्क के आधार पर यह विचार किया जा रहा है कि जब कंपनियां कंटेंट की रैंकिंग और सिफारिश करती हैं, तो उन्हें उसकी आंशिक जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।