स्वतंत्र बोल
रायपुर 27 अक्टूबर 2026: रायपुर में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ के लिए जुटे हैं। संघ ने धान बोनस के बकाया भुगतान, धान 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने और किसानों की दूसरी समस्याओं के समाधान की मांग की है। प्रदेशभर के किसानों के शामिल होने की बात कही गई है। संघ ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर नया रायपुर स्थित महानदी भवन के घेराव की बात कही है।
किसान संघ की प्रमुख मांगों में वर्ष 2022-23 की धान खरीदी का 1,700 करोड़ रुपये बकाया चुकाना और तीन वर्षों की 258 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य वृद्धि का लाभ देते हुए धान 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदना शामिल है। संघ ने फल और सब्जी उत्पादक किसानों को कृषक उन्नति योजना से जोड़ने की मांग भी की है।
धान खरीदी की अवधि और टोकन व्यवस्था में बदलाव की मांग
भारतीय किसान संघ चाहता है कि धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक तय की जाए। संघ ने प्रत्येक तौल में अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेने के संबंध में शासनादेश जारी करने की मांग भी रखी है।
इसके अलावा बड़े किसानों को पांच, लघु किसानों को तीन और सीमांत किसानों को दो टोकन देने की मांग की गई है। संघ ने किसानों पर दबाव डालकर बैंक खाते समर्पित कराने की प्रक्रिया बंद करने की भी मांग उठाई है।
गौ संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं पर जोर
संघ ने गौवंदन योजना लागू करने और जी-राम-जी योजना को गौ संरक्षण एवं संवर्धन से जोड़ने की मांग की है। इसके साथ ही अरपा-भैंसाझार सहित अधूरी सिंचाई परियोजनाओं के काम में तेजी लाने और पैरी हाईडैम जैसी नई परियोजनाओं को तत्काल मंजूरी देने की मांग रखी गई है।
फसल नुकसान पर मुआवजा और खाद की कीमतों का मुद्दा
किसान संघ ने बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। संघ ने निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की है।
भूमि अधिग्रहण और दूसरी फसलों की MSP पर खरीदी
भारतीय किसान संघ ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर घोषणा-पत्र के अनुरूप काम करने की मांग की है।
जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए संघ ने मक्का और गेहूं की खरीदी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने की मांग रखी है। संघ का कहना है कि इससे किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।


